लैंड-फॉर-जॉब्स मामला: राबड़ी देवी की 1,600 दस्तावेज़ों की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI से जवाब तलब किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की है।

राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 1,600 ‘अनरिलाइड’ दस्तावेज़ उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने 18 मार्च को राबड़ी देवी और उनके पति, आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की समान मांगों को खारिज कर दिया था।

ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इन दस्तावेज़ों को एक साथ उपलब्ध कराना “कार्ट को घोड़े के आगे रखने” जैसा होगा और इससे न्यायिक प्रक्रिया में “पूर्ण अव्यवस्था” पैदा हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों को क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन के नाम पर ट्रायल की प्रक्रिया पर नियंत्रण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जांच के दौरान जब्त किए गए लेकिन चार्जशीट में शामिल न किए गए ये दस्तावेज़ उनके बचाव की तैयारी और गवाहों से जिरह के लिए जरूरी हैं। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कानून के तहत ऐसे दस्तावेज़ देना आरोपियों का अधिकार नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों को पहले ही इन दस्तावेज़ों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है और शुरुआती चरण में इनके अभाव से बचाव पक्ष को कोई नुकसान नहीं होता।

READ ALSO  सहमति से बने चार साल के रिश्ते के बाद विवाह से इनकार अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इसी मामले में अन्य आरोपियों—लालू प्रसाद के निजी सचिव आर.के. महाजन और पूर्व रेलवे महाप्रबंधक महीप कपूर—की ओर से दायर इसी तरह की याचिकाएं भी ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दी थीं।

यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे में ग्रुप-डी नियुक्तियों से जुड़ा है। CBI के अनुसार, इन नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों ने अपनी जमीनें लालू प्रसाद के परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर स्थानांतरित या उपहार स्वरूप दी थीं।

CBI ने 18 मई 2022 को इस मामले में केस दर्ज किया था, जिसमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, उनकी दो बेटियां, कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।

ट्रायल कोर्ट ने पहले अपने आदेश में कहा था कि लालू प्रसाद ने अपने पद का दुरुपयोग कर नियुक्तियां सुनिश्चित कीं, जबकि उनके तत्कालीन निजी सचिव महाजन ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को अंजाम देने में भूमिका निभाई।

READ ALSO  केरल हाई कोर्ट का कहना है कि फिल्म समीक्षाओं का उद्देश्य सूचना देना, ज्ञान देना है न कि नष्ट करना, जबरन वसूली करना

इस मामले में 9 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया था। कुल 103 आरोपियों में से 41 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, जबकि 52 को आरोपमुक्त कर दिया गया है। पांच आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

इस बीच, लालू प्रसाद यादव द्वारा CBI की FIR और आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका भी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।

READ ALSO  न्यायालय द्वारा जारी बिक्री प्रमाण पत्र के पंजीकरण के लिए कोई समय सीमा नहीं, सब-रजिस्ट्रार देरी के आधार पर इनकार नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles