‘स्लम मुक्त मुंबई’ का सपना होगा पूरा? बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को दिया ‘स्लम एक्ट’ के ऑडिट का आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को एक ऐतिहासिक निर्देश देते हुए ‘महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट’ (Maharashtra Slum Areas Act) के परफॉर्मेंस ऑडिट का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति (Expert Panel) गठित करने को कहा है, जो इस कानून की कमियों और इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा करेगी। अदालत का उद्देश्य मुंबई सहित राज्य के अन्य बड़े शहरों को “झुग्गी-मुक्त” बनाने के उस सपने को हकीकत में बदलना है, जो अब तक अधूरा रहा है।

जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में टाउन प्लानिंग के आदर्शों को पीछे छोड़ दिया गया है, विशेष रूप से सार्वजनिक भूमि के प्रबंधन के मामले में।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को एक महीने के भीतर इस विशेषज्ञ पैनल का गठन करना होगा। इस समिति का मुख्य कार्य ‘स्लम एक्ट’ की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना, कानूनी खामियों की पहचान करना और सुधार के लिए सुझाव देना होगा। पैनल का लक्ष्य एक “व्यवस्थित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण” विकसित करना है ताकि शहरी पुनर्विकास (Urban Redevelopment) को सही दिशा मिल सके।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें राज्य के स्लम संबंधी कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा करने को कहा गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में टाउन प्लानिंग की प्रगति बेहद निराशाजनक रही है, जहाँ आज भी एक बड़ा हिस्सा झुग्गियों से ढका हुआ है।

अदालत ने कहा, “ऐसी कोई भी टाउन प्लानिंग जो समय के साथ नहीं चलती, वह संदिग्ध है।” बेंच ने याद दिलाया कि 21वीं सदी की आकांक्षाओं और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

पीठ ने सरकार से अपील की कि वह छिटपुट सुधारों के बजाय ‘एरिया-वाइज’ प्लानिंग (क्षेत्र-वार योजना) पर ध्यान केंद्रित करे। कोर्ट ने माना कि झुग्गियों को पूरी तरह समाप्त करना एक “बेहद कठिन कार्य” (Herculean Task) है, लेकिन अगर शासन की इच्छाशक्ति मजबूत हो और जनहित के प्रति सच्ची निष्ठा हो, तो इसे हासिल किया जा सकता है।

यह फैसला महाराष्ट्र के नीति-निर्धारकों के लिए एक ‘कॉल टू एक्शन’ है, ताकि राज्य की आवास नीति और सार्वजनिक भूमि के उपयोग को आधुनिक बनाया जा सके और मुंबई को सही मायने में एक ग्लोबल सिटी का रूप दिया जा सके।

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