सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के आगामी चुनावों की मतदाता सूची से बाहर किए गए वकीलों की शिकायत पर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, कटनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने इन वकीलों को अपनी कमियों को सुधारने की अनुमति दी है, ताकि वे 12 मई, 2026 को होने वाले मतदान में भाग ले सकें।
मामले की पृष्ठभूमि
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, कटनी और उसके एक सदस्य ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन वकीलों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की गई थी जिन्हें आगामी चुनावों से बाहर रखा गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, एसोसिएशन ने 15 अप्रैल, 2026 को चुनाव अधिकारी को एक पत्र लिखा था जिसमें बताया गया था कि शुरुआत में कटनी एसोसिएशन के 235 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। एसोसिएशन के विरोध के बाद, 1 अप्रैल, 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची में 183 नाम वापस जोड़ दिए गए, लेकिन 52 वकील अब भी मताधिकार से वंचित रह गए थे।
पक्षों की दलीलें और कोर्ट का विश्लेषण
सुनवाई के दौरान, रिटर्निंग ऑफिसर (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सुशील कुमार पालो) की ओर से पेश वकील ने एक नोट प्रस्तुत किया। इस नोट में मतदाता सूची में शामिल होने के लिए अनिवार्य शर्तों का उल्लेख किया गया था:
- एडवोकेट वेलफेयर फंड (AWF) रूल्स, 2001 के तहत निर्धारित शुल्क जमा करना।
- सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल, 2015 का पालन करना।
- उक्त नियमों के तहत “घोषणा पत्र” (Declaration Form) जमा करना।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के 2013 के निर्देशानुसार ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास करना।
पीठ ने पाया कि हालांकि ये शर्तें मानक हैं, लेकिन सूची से बाहर किए गए लगभग 50 वकीलों को उनके निष्कासन के व्यक्तिगत कारणों की जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बाद, प्रतिवादी के वकील ने अदालत को सूचित किया कि स्टेट बार काउंसिल की वेबसाइट पर अब इन वकीलों के नाम और उनके बाहर किए जाने के विशिष्ट कारण अधिसूचित कर दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
वेबसाइट पर कारणों की उपलब्धता को देखते हुए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकीलों को अपनी त्रुटियों को सुधारने का मौका दिया। कोर्ट ने आदेश दिया:
“यदि ऐसा है, तो हम याचिकाकर्ता संख्या 1-एसोसिएशन के बाहर किए गए सदस्यों को चिह्नित आपत्तियों के संबंध में दो दिनों के भीतर, यानी 07.05.2026 या उससे पहले सुधार करने की अनुमति देते हैं।”
पीठ ने आगे निर्देश दिया कि यदि ये सदस्य कमियों को दूर कर लेते हैं, तो उनके दावों पर जबलपुर स्थित ‘हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी’ द्वारा पुनः विचार किया जाएगा। इसके बाद, 9 मई, 2026 तक एक परिशिष्ट (Addendum) के माध्यम से मतदाता सूची में संशोधन किया जाएगा।
कोर्ट ने अंत में स्पष्ट किया:
“यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि जो लोग संशोधित मतदाता सूची में शामिल होंगे, वे चुनाव की तिथि 12.05.2026 को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के हकदार होंगे।”
इस आदेश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।
केस विवरण
- केस का नाम: डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, कटनी और अन्य बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य
- केस संख्या: रिट याचिका (सिविल) संख्या 564/2026
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची
- तारीख: 04-05-2026

