सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वाहन के गतिमान होने पर सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य करने से जुड़े पर्याप्त कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं और इनका पालन सुनिश्चित कराना प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वाहनों में सीट बेल्ट का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह बात कही।
पीठ ने सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि सीट बेल्ट को लेकर वैधानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और मुख्य मुद्दा इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का है। अदालत ने सवाल उठाया कि देश के हर नागरिक और वाहन चालक से नियमों का अनुपालन कैसे सुनिश्चित कराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि लोगों द्वारा नियमों की अनदेखी करना या नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में जांच एजेंसियों की विफलता मूल रूप से कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 138(3) का दिया हवाला
अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 138(3) का संदर्भ देते हुए कहा कि मौजूदा प्रावधानों के तहत वाहन चलते समय चालक, आगे की सीट पर बैठने वाले व्यक्ति और आगे की तरफ मुंह वाली पिछली सीटों पर बैठे यात्रियों के लिए सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है। पीठ के अनुसार, सड़क सुरक्षा और सीट बेल्ट के उपयोग के संबंध में नियमों में कोई शून्यता नहीं है।
फैंसी सीट कवर और सड़क हादसों पर याचिकाकर्ता की दलील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली कई मौतों और गंभीर चोटों को रोका जा सकता है, बशर्ते सीट बेल्ट से संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन हो। उन्होंने अदालत को बताया कि नियम होने के बावजूद कई वाहनों में फैंसी सीट कवर लगाने या अन्य बदलावों के चलते सीट बेल्ट अनुपयोगी या बंद हो जाती हैं। वकील ने कहा कि लोगों की लापरवाही और ढीली कानूनी निगरानी के चलते लगातार जानलेवा हादसे हो रहे हैं।
सक्षम प्राधिकारी को सुझाव भेजने की छूट देकर याचिका का निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जमीनी स्तर पर अनुपालन कराना कानून लागू करने वाली एजेंसियों का मूल दायित्व है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने नए दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह अपने व्यावहारिक सुझावों के साथ अपनी याचिका की एक प्रति संबंधित सक्षम प्राधिकारी को भेज सकते हैं, ताकि उन पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा सके।

