CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ग्रेटर नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट से मांगेगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट से यह स्पष्टीकरण मांगेगा कि जंतर-मंतर पर Cockroach Janata Party (CJP) के हालिया प्रदर्शन में शामिल दूसरे वर्ष के एक छात्र को नोटिस कैसे जारी किया गया, जबकि कोर्ट पहले ही छात्रों के खिलाफ इस मामले में आगे किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले पर सुनवाई के दौरान अपने पहले के आदेश का जिक्र किया और कहा कि छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर निर्देश स्पष्ट था।

सीनियर एडवोकेट बिस्वजीत भट्टाचार्य ने बुधवार सुबह बेंच के सामने यह मामला रखा। उन्होंने बताया कि नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर ग्रेटर नोएडा के एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को 4 सितंबर को नोटिस जारी किया था।

भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश के विपरीत थी। उस आदेश में प्रदर्शन में भाग लेने को लेकर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही बंद करने और छात्रों के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था।

नोटिस वापस लेने की खबर, लेकिन छात्र को नहीं मिला आधिकारिक आदेश

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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि 4 सितंबर का नोटिस बाद में वापस लिए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, भट्टाचार्य के मुताबिक छात्र को नोटिस वापस लेने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया और उसे इसकी जानकारी केवल मीडिया रिपोर्टों से मिली।

भट्टाचार्य ने दलील दी कि नोटिस जारी होते ही सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश का कथित उल्लंघन हो चुका था। ऐसे में बाद में नोटिस वापस लेने मात्र से कथित अवमानना का मुद्दा समाप्त नहीं हो जाता।

उन्होंने यह भी कहा कि मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है और इस तरह की कार्रवाई का देशभर के छात्रों पर असर पड़ सकता है।

जिला मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगा सुप्रीम कोर्ट

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बेंच ने सुनवाई के दौरान दोहराया कि उसका पिछला आदेश छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के कारण दंडात्मक कार्रवाई से स्पष्ट रूप से संरक्षण देता है।

इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट जिला मजिस्ट्रेट से यह बताने को कहेगा कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के निर्देश के बावजूद छात्र को नोटिस किन परिस्थितियों में जारी किया गया।

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