ईडब्ल्यूएस मरीजों के आपात इलाज का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने यथार्थ अस्पताल पर झूठा हलफनामा देने के आरोप में शुरू की अवमानना कार्रवाई

गरीब (ईडब्ल्यूएस) मरीजों के मुफ्त आपातकालीन इलाज के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत में नोटिस न मिलने का झूठा दावा करने पर पीठ ने अस्पताल के खिलाफ औपचारिक अवमानना कार्रवाई शुरू कर दी है।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने बुधवार को यथार्थ अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

कार्यालय रिपोर्ट से पकड़ा गया झूठा हलफनामा

अस्पताल ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि उसे एसओपी से जुड़ी बैठक में शामिल होने के लिए कोई न्यायिक नोटिस नहीं मिला। हालांकि, अदालत ने जब रिकॉर्ड की जांच की, तो अस्पताल का यह दावा पूरी तरह गलत निकला।

पीठ ने स्पष्ट किया कि 2 अप्रैल, 2026 की कार्यालय रिपोर्ट से यह साफ दर्ज है कि अस्पताल को विधिवत नोटिस भेजा जा चुका था। अदालत ने कहा कि अस्पताल की ओर से दिया गया बयान रिकॉर्ड के विपरीत और पहली नजर में पूरी तरह झूठा है। इसी आधार पर पीठ ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के मार्फत अस्पताल के खिलाफ अवमानना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।

READ ALSO  हाई कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में यूपी के 5 पुलिसकर्मियों की दोषसिद्धि बरकरार रखी, 10 साल की जेल की सजा

52 में से सिर्फ 12 निजी अस्पताल पहुंचे बैठक में

सुनवाई के दौरान मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) बनाए गए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने शीर्ष अदालत को बताया कि आपातकालीन इलाज के नियमों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में 52 में से महज 12 अस्पताल ही शामिल हुए। उन्होंने अदालत को यह भी जानकारी दी कि पूर्व निर्देशों के अनुसार एक संशोधित एसओपी तैयार कर दाखिल कर दी गई है।

READ ALSO  Woman Employee Moves Supreme Court Challenging Governor’s Immunity After Molestation Allegations at WB Raj Bhavan

अन्य निजी अस्पतालों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत से कहा कि वे संशोधित एसओपी पर अपने सुझाव और जवाब पेश करना चाहते हैं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर तय कर दी।

रियायती जमीन पाने वाले अस्पतालों पर 2018 का फैसला

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के साल 2018 के एक अहम फैसले के क्रियान्वयन से जुड़ा है। उस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन निजी अस्पतालों ने सरकार से रियायती दरों पर जमीन ली है, उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराना अनिवार्य है। नियमों के तहत ऐसे अस्पतालों को अपने आईपीडी (भर्ती मरीजों) में 10 प्रतिशत और ओपीडी में 25 प्रतिशत इलाज गरीब मरीजों को मुफ्त देना होगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles