रेणुकास्वामी हत्याकांड: सह-आरोपी के सरकारी गवाह बनने के फैसले को हाईकोर्ट ने किया रद्द, निचली अदालत को दोबारा निर्णय लेने का निर्देश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने रेणुकास्वामी हत्याकांड के आरोपी नंबर 14 प्रदोष राव को सरकारी गवाह बनाने के बेंगलुरु की एक निचली अदालत के आदेश को मंगलवार को निरस्त कर दिया। मामले को वापस निचली अदालत भेजते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह आदेश की प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इस पर नए सिरे से निर्णय ले।

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कन्नड़ अभिनेता दर्शन की याचिका पर यह फैसला सुनाया। दर्शन इस मामले में आरोपी नंबर दो हैं और उन्होंने निचली अदालत के रुख को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पीठ ने दर्शन की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निचली अदालत के 25 अगस्त के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत राव को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी गई थी। इसके साथ ही 20 अगस्त के उस आदेश को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें राव को लेकर एक प्रोबेशन अधिकारी से रिपोर्ट तलब की गई थी।

प्रक्रियागत खामियों पर अदालत की टिप्पणी

जस्टिस नागप्रसन्ना ने मामले में अपनाई गई प्रक्रिया में गंभीर खामियों का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देशित किया कि वह कानून के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 307 के तहत राव के आवेदन पर दोबारा आदेश पारित करे।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निचली अदालत को इस अर्जी पर नए सिरे से कोई मौखिक सुनवाई करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत को केवल हाईकोर्ट के फैसले की प्रमाणित प्रति मिलने के सात दिनों के भीतर, उसमें की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए नया आदेश जारी करना होगा।

मामले की पृष्ठभूमि और पूर्व याचिका

रेणुकास्वामी हत्याकांड में कुल 17 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें अभिनेता दर्शन और उनकी मित्र अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा भी शामिल हैं। दर्शन वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

READ ALSO  हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अभ्यावेदन पर निर्णय में अकारण देरी से प्रिवेंटिव डिटेंशन अवैध: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हिरासत आदेश रद्द किया

इससे पहले 13 अगस्त को हाईकोर्ट ने दर्शन की एक अन्य याचिका खारिज कर दी थी। उस याचिका में दर्शन ने सत्र अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें राव के क्षमादान और सरकारी गवाह बनने के आवेदन पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

Ad 20- WhatsApp Banner
READ ALSO  ज़मानत याचिका सुनते वक़्त सुप्रीम कोर्ट के जज ने सुनाया अपना अनुभव जब उनकी कृषि भूमि पर हुई चोरी- जाने विस्तार से

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles