त्रिपुरा हाईकोर्ट ने राज्य में नवनिर्मित राष्ट्रीय राजमार्गों के तेजी से बदहाल होने पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एनएचआईडीसीएल की कार्यप्रणाली का व्यापक ‘सिस्टमैटिक ऑडिट’ कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राजमार्ग अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के बीच संभावित सांठगांठ और भ्रष्टाचार की जांच के आदेश भी दिए हैं।
चीफ जस्टिस एम एस रामचंद्र राव और जस्टिस बिस्वजीत पालित की खंडपीठ ने 8 सितंबर को स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहे राष्ट्रीय राजमार्ग उद्घाटन से पहले या उसके तुरंत बाद और कई बार तो पहली ही बारिश में उखड़ रहे हैं। कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इस लापरवाही से आम नागरिकों के जीवन और उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 1 दिसंबर 2026 तक एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपे। इस जांच में यह देखा जाएगा कि ठेकेदारों के चयन में कोई अनियमितता हुई या एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) ठेकेदारों के बीच मिलीभगत के चलते सड़कों में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
डीएलएसए की जमीनी पड़ताल में दावों की खुली पोल
यह अदालती कार्रवाई जून और जुलाई में स्थानीय अखबारों में छपी उन खबरों के बाद शुरू हुई, जिनमें एनएच 108बी और एनएच 208 पर बड़े-बड़े गड्ढों, टूटी सड़कों और भारी जलभराव का खुलासा किया गया था। एनएच 108बी अगरतला से खोवाई तक लगभग 55 किलोमीटर लंबा है, जबकि एनएच 208 कुमारघाट से कैलाशहर, खोवाई, तेलियामुड़ा और अमरपुर होते हुए सबरूम तक करीब 158 किलोमीटर में फैला है।
खोवाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने 17, 18 और 20 जुलाई को दोनों राजमार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस जांच में एनएचआईडीसीएल के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया, जिनमें सड़कों को सुरक्षित और चलने योग्य बताया जा रहा था। टीम ने एनएच 208 पर महादेबटीला से मानिकभांडार के बीच 30.32 किलोमीटर और एनएच 108बी पर महादेवटीला से मोहनबाड़ी (14 किमी) व मोहनबाड़ी से मोहनपुर (12 किमी) हिस्से का जायजा लिया।
रिपोर्ट में पाया गया कि सड़कों पर जगह-जगह खतरनाक गड्ढे हैं, डामर उखड़ चुका है, नालियां जाम होने से पानी भरा है और डिवाइडर क्षतिग्रस्त हैं। इसके अलावा कई संवेदनशील मोड़ों पर क्रैश बैरियर और रिटेनिंग वॉल तक नदारद हैं।
लागत और देरी पर सवाल, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का अंदेशा
हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पांच साल की ‘डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड’ (दोष देयता अवधि) में होने के बावजूद सड़कें टिक नहीं पा रही हैं। एनएच 108बी के कार्य आदेश जुलाई 2020 में जारी हुए थे और इसके दो पैकेज अप्रैल 2023 व मई 2024 में पूरे हुए, जबकि एनएच 208 के कैलाशहर-खोवाई खंड का काम मई 2020 में शुरू हुआ था।
विशेष रूप से एनएच 108बी के मोहनपुर-हेजामारा-सुबलसिंह खंड में वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठे। 1 मार्च 2024 को शुरू हुए इस काम की मूल समय सीमा 31 अगस्त 2025 थी, जिसे बढ़ाकर 4 सितंबर 2026 कर दिया गया। 5 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक खर्च करने के बाद भी यहां महज 51.14 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। खंडपीठ ने कहा कि यह स्थिति ठेकेदारों के चयन पर गंभीर संदेह पैदा करती है और इसमें एनएचआईडीसीएल कर्मियों व ठेकेदारों की मिलीभगत की पूरी आशंका नजर आती है।
बीआरओ करेगा तकनीकी परीक्षण, राज्य सरकार को कानूनी कार्रवाई का निर्देश
राज्य सरकार ने दलील दी कि 2025 के मानसून में हुई भारी बारिश से सड़कें टूटीं, हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि मरम्मत का काम बेहद असंतोषजनक रहा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इतने महीनों तक राज्य सरकार का हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना समझ से परे है। राज्य सरकार चाहती तो सड़कों का नियंत्रण अपने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को वापस देने की मांग कर सकती थी या दोषी एजेंसियों पर कानूनी कार्रवाई कर सकती थी।
हाईकोर्ट ने एनएचआईडीसीएल को आदेश दिया कि वह दोनों राजमार्गों के चार चिन्हित हिस्सों में चल रहे मरम्मत कार्य की हर दो हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करे। इसके साथ ही राज्य प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वह एनएचआईडीसीएल और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं तलाशे।
अदालत ने यह भी तय किया कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के इंजीनियर इन सभी हिस्सों का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण करेंगे और 30 जनवरी 2027 तक सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

