कोयला बिजली संयंत्रों में उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली लगाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एनजीटी भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के श्रेणी ‘ए’ थर्मल पावर प्लांटों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्रणाली को तय समय सीमा के भीतर चालू कराने के निर्देश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता से इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाने को कहा है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे पूरी तरह से एनजीटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। वहीं, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

अंतरिम राहत पर प्राथमिकता से विचार करने का आग्रह

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह एनजीटी से इस मामले में अंतरिम राहत की मांग पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने का आग्रह करेगी।

याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि श्रेणी ‘ए’ के सभी ताप बिजली संयंत्रों में एफजीडी लगाने और उन्हें संचालित करने का काम समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए। कोयला आधारित बिजली घरों में एफजीडी प्रणाली पर्यावरण नियमों के अनुरूप सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को घटाने के लिए लगाई जाती है।

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बार-बार बढ़ाई गई समय सीमा पर जताई चिंता

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी कि थर्मल पावर प्लांटों में एफजीडी लगाने की अनिवार्यता की समय सीमा को बार-बार बढ़ाया जा रहा है। वकील ने कहा कि इस प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान के कारण आम जनता को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को दर्ज किया कि याचिकाकर्ता के अनुसार अनुपालन की यह बढ़ाई गई समय सीमा अब वर्ष 2027 में समाप्त होने वाली है। इसके अलावा, याचिका में श्रेणी ‘ए’ संयंत्रों में एफजीडी स्थापना की प्रगति की निगरानी करने और उत्सर्जन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया था।

दिसंबर 2015 की अधिसूचना और श्रेणी ‘ए’ का पैमाना

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याचिका के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस संबंध में दिसंबर 2015 में एक अधिसूचना जारी की थी।

नियमों के तहत श्रेणी ‘ए’ के थर्मल पावर प्लांट वे संयंत्र हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं या फिर 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के निकट आते हैं।

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