शिलांग के होमस्टे में तोड़फोड़: यूपी के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर मेघालय हाईकोर्ट ने की रद्द, दो को मिली सामाजिक सेवा की सजा

मेघालय हाईकोर्ट ने यहां एक होमस्टे में तोड़फोड़ करने के आरोपी उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत का यह फैसला दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते और छात्रों द्वारा 2.06 लाख रुपये का हर्जाना चुकाए जाने के बाद आया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले के दो बालिग छात्रों को 25,000-25,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने और छह दिनों तक सामाजिक सेवा करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की अदालत ने सोमवार को यह आदेश जारी किया। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद होमस्टे के मालिक और प्रबंधक ने एफआईआर को निरस्त करने पर अपनी अनापत्ति दर्ज कराई थी। जस्टिस डेरे ने कहा कि पक्षों के बीच हुए समझौते और छात्रों के भविष्य व कल्याण को ध्यान में रखते हुए एफआईआर रद्द करने में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं है।

अतिरिक्त जुर्माना और माफीनामा

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समझौते की शर्तों के मुताबिक, छात्रों ने होमस्टे मालिक को पूर्ण एवं अंतिम क्षतिपूर्ति के रूप में 2.06 लाख रुपये की राशि सौंप दी है। इसके अलावा छात्रों ने अपने किए और व्यवहार पर बिना शर्त औपचारिक माफी भी मांगी।

अदालत ने आपराधिक कार्यवाही समाप्त करते हुए दो बड़े छात्रों को निर्देश दिया कि वे एक हफ्ते के भीतर होमस्टे मालिक को 25,000-25,000 रुपये की अतिरिक्त धनराशि अदा करें। अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों छात्र 20 से अधिक उम्र के हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

छह दिन की सामाजिक सेवा अनिवार्य

हाईकोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे इन दोनों छात्रों को शिलांग में छह दिन की सामाजिक सेवा करने का आदेश भी दिया। अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों छात्र 8 सितंबर से तीन दिनों तक लचुमिएरे स्थित सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. कमलजीत सिंह की देखरेख में सेवा कार्य करेंगे।

इसके बाद बाकी दिनों में उन्हें जीवा केयर्स के ‘प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप’ के तहत जिम्मेदारी निभानी होगी। इस दौरान वे शहर में कूड़ेदानों और फूलों के रखरखाव के अलावा उमख्राह नदी से जुड़ी सफाई गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।

अदालत ने संबंधित लोक अभियोजक के माध्यम से यह रिपोर्ट पेश करने को कहा है कि क्या सामाजिक सेवा संतोषजनक ढंग से पूरी हुई या नहीं। उम्र को ध्यान में रखते हुए बाकी चार छात्रों को सामाजिक सेवा से छूट दी गई है, जिनमें 15 वर्ष का एक नाबालिग, 17 वर्ष के दो नाबालिग और एक हाल ही में 18 वर्ष का हुआ युवक शामिल है। हाईकोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट दर्ज करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है।

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अतिरिक्त मेहमान ठहराने को लेकर हुआ था विवाद

यह पूरा विवाद 11 जुलाई को शुरू हुआ था, जब कमरे की तय क्षमता से अधिक मेहमानों को ठहराने की अनुमति न मिलने पर विवाद बढ़ गया। इसके बाद लैतुमख्राह थाने में होमस्टे में तोड़फोड़ करने और शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

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