पंजाब में नशे का कहर: ‘5 बेटों को खोने वाली मां का दर्द डराने वाला’, सुप्रीम कोर्ट ने ‘बड़े मगरमच्छों’ पर कार्रवाई का दिया आदेश

पंजाब में गहराते ड्रग्स संकट पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने राज्य में नशे की स्थिति को “भयावह” बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब केंद्र सरकार को इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने पंजाब पुलिस की रणनीति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि केवल छोटे-मोटे अपराधियों को पकड़ने से यह समस्या हल नहीं होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक स्थानीय महिला का जिक्र किया जिसने नशे की लत के कारण अपने पांचों बेटों को खो दिया। चीफ जस्टिस कांत ने भावुक होते हुए कहा, “देखिए हम क्या पढ़ रहे हैं। एक मां रो रही है, उसने अपना पांचवां बेटा भी ड्रग्स की वजह से खो दिया। उसने अपनी पूरी औलाद नशे की भेंट चढ़ा दी।”

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों और पुलिस बल को इस मानवीय त्रासदी के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।

अदालत ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में पुलिस का ध्यान “अखबारों में सुर्खियां बटोरने” पर ज्यादा है। जस्टिस कांत ने स्पष्ट किया कि पुलिस छोटे नशेड़ियों को गिरफ्तार कर वाहवाही लूटती है, जबकि इस काले कारोबार को चलाने वाले “बड़े और प्रभावशाली मगरमच्छ” कानून की पकड़ से बाहर रहते हैं।

कोर्ट ने लुधियाना को इस अवैध व्यापार का “केंद्र” (एपिसेंटर) करार दिया और निर्देश दिया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपना ध्यान निचले स्तर के अपराधियों से हटाकर उन सिंडिकेट्स पर लगाना चाहिए जो नशे की आपूर्ति कर रहे हैं।

नशे के बढ़ते जाल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। चीफ जस्टिस ने कहा, “शायद अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत है। लेकिन जब वे हस्तक्षेप करें, तो इसे राजनीति के चश्मे से न देखा जाए। साझा लक्ष्य केवल एक होना चाहिए—नशे की समस्या को जड़ से मिटाना।”

READ ALSO  ₹640 करोड़ साइबर फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन में सरेंडर का दिया निर्देश

अदालत ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत लंबित पड़े हजारों मामलों पर भी चिंता जताई। सुनवाई में देरी के कारण बड़े तस्कर अक्सर बच निकलते हैं। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में “विशेष एनडीपीएस अदालतें” (Special NDPS Courts) स्थापित करने की बात कही। इन समर्पित अदालतों का लक्ष्य नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण करना और बड़े तस्करों को जल्द से जल्द सजा दिलाना होगा।

READ ALSO  हर महिला सम्मान की उम्मीद करती है; किसी लड़की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध का मतलब शारीरिक संबंध स्थापित करने की सहमति नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles