‘हज के लिए परिवार का जाना जमानत का आधार नहीं’, दिल्ली हाई कोर्ट ने PFI नेता अनीस अहमद की अर्जी खारिज की

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के नेता अनीस अहमद को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परिवार के सदस्यों का हज यात्रा पर जाना, आतंकवाद विरोधी कड़े कानून (UAPA) के तहत जेल में बंद आरोपी को रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने 5 मई को दिए अपने आदेश में अहमद की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के 27 मार्च के फैसले को चुनौती दी थी। अहमद ने अपनी मां और परिजनों के हज पर जाने से पहले उनसे मिलने के लिए छह दिनों की राहत मांगी थी।

अनीस अहमद ने तर्क दिया था कि अपने परिजनों के हज पर जाने से पहले उनसे मिलना उनकी सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है। उसने कहा कि इस पवित्र यात्रा पर जाने वाले बड़ों से आशीर्वाद लेना एक आवश्यक रीत है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने हज की आध्यात्मिक गरिमा को स्वीकार करते हुए कानून की कठोरता पर बल दिया। कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि हज एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धार्मिक यात्रा है… लेकिन केवल परिवार के सदस्यों का इस यात्रा पर जाना अपीलकर्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।”

अदालत का फैसला सुरक्षा चिंताओं और PFI में अहमद के ऊंचे कद पर आधारित था। बेंच ने नोट किया कि यदि जमानत दी जाती है, तो अहमद को दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा करनी होगी, जिससे हवाई अड्डों पर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

चार्जशीट के अनुसार अहमद पर कई गंभीर आरोप हैं:

  • राष्ट्रीय नेतृत्व: वह PFI का राष्ट्रीय स्तर का पदाधिकारी था और देशभर में संगठन के प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करता था।
  • कट्टरपंथ और प्रशिक्षण: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का आरोप है कि अहमद युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, उनकी भर्ती करने और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था।
  • आतंकी साजिश: उस पर गैरकानूनी संगठनों के साथ मिलकर आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने का भी आरोप है।
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NIA ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि अहमद एक प्रतिबंधित संगठन का वरिष्ठ सदस्य है। जांच एजेंसी ने अंदेशा जताया कि उसकी रिहाई से “अशांति और वैमनस्य” फैल सकता है। एजेंसी के मुताबिक, PFI नेतृत्व ने देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी कृत्य करने के लिए फंड जुटाने और कैडरों को प्रशिक्षित करने के लिए आपराधिक साजिश रची थी।

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर, 2022 को PFI और उसके सहयोगियों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। यह कार्रवाई देशभर में हुई छापेमारी के बाद की गई थी, जिसमें जांच एजेंसियों ने इस समूह के तार वैश्विक आतंकी संगठनों (जैसे ISIS) से जुड़े होने का दावा किया था। अहमद फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी है।

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