लखीमपुर खीरी हिंसा: ट्रायल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- दो महीने से क्यों नहीं हुई गवाहों की पेशी?

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि पिछले लगभग दो महीनों से मुकदमे की कार्यवाही ठप है और किसी भी गवाह का बयान दर्ज नहीं किया गया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए कहा कि दस्तावेज में गवाहों को अदालत में पेश न करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।

अदालत की कार्यवाही के दौरान आ रही बाधाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। बेंच ने कहा, “हम पीठासीन न्यायाधीश (ट्रायल जज) को निर्देश देते हैं कि वे गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक और कानूनी उपाय करें।”

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल गवाहों की पेशी सुनिश्चित करने को कहा, बल्कि ट्रायल जज को यह भी निर्देश दिया कि वे इस मुकदमे को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास करें। इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले की प्रगति पर एक नई स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।

यह कानूनी लड़ाई 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसक घटना से जुड़ी है। उस समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

इस हिंसा में कुल आठ लोगों की जान गई थी:

  • चार किसान एक एसयूवी (SUV) वाहन से कुचले जाने के कारण मारे गए थे।
  • घटना के दौरान मची अफरा-तफरी में एक पत्रकार की भी मृत्यु हो गई थी।
  • इसके बाद भड़की हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
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इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने आशीष मिश्रा और 12 अन्य के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर धाराओं में आरोप तय किए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यह देखना होगा कि क्या आने वाले हफ्तों में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया फिर से गति पकड़ती है।

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