सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: NIA मामलों के लिए 30 दिन में बनेंगी विशेष अदालतें, केसों के निपटारे के लिए तय की नई डेडलाइन

राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े संवेदनशील मामलों में न्याय की रफ्तार बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए जा रहे मामलों की सुनवाई के लिए एक महीने के भीतर ‘विशेष अनन्य अदालतें’ (Exclusive Special Courts) स्थापित की जाएं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि NIA के मामले वर्षों तक लटके रहते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए हर 10 से 15 मुकदमों पर कम से कम एक विशेष अदालत का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने एक नया फॉर्मूला पेश किया है जिसके तहत मुकदमों की संख्या के आधार पर अदालतों की स्थापना होगी:

  • यदि किसी क्षेत्राधिकार में 10 से 15 मामले लंबित हैं, तो वहां एक विशेष अदालत होगी।
  • यदि लंबित मामलों की संख्या 15 से अधिक है, तो वहां दो विशेष अदालतें गठित की जाएंगी।
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कोर्ट ने इन विशेष अदालतों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। इन अदालतों में केवल NIA से संबंधित मामलों की ही सुनवाई होगी और इन्हें कोई अन्य न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा। पीठ ने निर्देश दिया कि मुकदमों की सुनवाई ‘डे-टू-डे’ (रोजाना) आधार पर की जानी चाहिए। साथ ही, न्यायाधीशों को इस तरह से केस लिस्ट करने की छूट दी गई है कि महीने में कम से कम एक मुकदमे का ट्रायल पूरा हो सके।

अदालतों की स्थापना के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ तत्काल परामर्श करने को कहा है। राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे इन अदालतों के लिए आवश्यक स्थान और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएं।

गौरतलब है कि इससे पहले कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिया था कि वह प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को UAPA और NDPS अधिनियम के तहत विशेष अदालतों की स्थापना के लिए 1-1 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराए।

कोर्ट ने कहा, “मुकदमों का जल्द निपटारा आरोपी और पीड़ित, दोनों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।” यह आदेश शीर्ष अदालत द्वारा शुरू की गई एक स्वतः संज्ञान (suo motu) याचिका पर आया है, जिसका शीर्षक ‘In Re: creation of special exclusive courts’ है।

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मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी, जिसमें कोर्ट राज्यों और केंद्र द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा करेगा।

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