अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए इस मामले की “गहन और समयबद्ध जांच” अनिवार्य है। यह टिप्पणी तब आई जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने खुलासा किया कि सात लंबित मामलों में अनुमानित वित्तीय नुकसान लगभग ₹27,337 करोड़ तक पहुंच गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में अंबानी के नेतृत्व वाली विभिन्न संस्थाओं में ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित ऋण घोटालों की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
एजेंसियों का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जांच की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक कुल नौ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से दो में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि सात अन्य मामलों में जांच अभी भी सक्रिय रूप से जारी है।
जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 14 स्थानों पर छापेमारी की गई है और लगभग 3,960 दस्तावेज एकत्र किए गए हैं। एजेंसियों ने अब तक 31 लुकआउट सर्कुलर जारी किए हैं और दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस होम फाइनेंस (₹7,500 करोड़) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (₹8,200 करोड़) में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन की हेराफेरी का आरोप लगाया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अनिल अंबानी की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाए। भूषण ने तर्क दिया कि जब एजेंसियां खुद अंबानी को ₹27,000 करोड़ के घोटाले का “किंगपिन” (मुख्य सूत्रधार) मान रही हैं, तो उन्हें अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ऐसा लगता है जैसे वह कोई ‘होली काऊ’ (पवित्र गाय) हैं जिन्हें छुआ नहीं जा सकता।”
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के निर्देश देने पर सतर्क रुख अपनाया। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच एजेंसी स्वयं अनुरोध न करे, अदालत गिरफ्तारी का आदेश देने में “बेहद संकोच” करेगी। कोर्ट ने टिप्पणी की, “यदि हम जांच एजेंसियों को ‘शिकारी कुत्तों’ (Bloodhounds) की तरह सक्रिय कर देंगे, तो यह हमारे द्वारा स्थापित कानूनों के विपरीत होगा।” अदालत का जोर सनसनी फैलाने के बजाय अनुशासित तरीके से साक्ष्य जुटाने पर रहा।
अनिल अंबानी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। सिब्बल ने याचिकाकर्ता के पास कानूनी दस्तावेजों की पहुंच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “याचिकाकर्ता का एकमात्र एजेंडा अनिल अंबानी को गिरफ्तार कराना है। शायद मुझे (अंबानी) ही ठगा गया हो।”
यह मामला 2013 और 2017 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से लिए गए ₹31,580 करोड़ के ऋण की कथित हेराफेरी और वित्तीय विवरणों में धोखाधड़ी से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट, जिसने पहले जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताई थी, अब खुद इस मामले की निगरानी करेगा। अनिल अंबानी ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी।

