शादी की ‘बारात’ में देरी और बस खराब होने पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया ₹50,000 का जुर्माना

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-VIII (सेंट्रल), दिल्ली ने शादी समारोह के लिए बुक की गई बस के बीच रास्ते में खराब होने और समय पर गंतव्य तक न पहुँचने को सेवा में कमी (deficiency in service) माना है। आयोग ने ‘कैप्रिकॉर्न ट्रांसपोर्ट सर्विसेज’ को सेवा में कोताही का जिम्मेदार ठहराते हुए दूल्हे को हुई “मानसिक पीड़ा और सामाजिक अपमान” के लिए मुआवजे के साथ-साथ एडवांस राशि वापस करने का निर्देश दिया है। यह फैसला अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता कपिल कुमार ने 8 दिसंबर, 2022 को अपनी बारात दिल्ली से बुलंदशहर ले जाने के लिए 25 अक्टूबर, 2022 को एक बस बुक की थी। कुल तय राशि ₹18,500 में से ₹14,000 का भुगतान एडवांस के रूप में किया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, बस को दोपहर 2:30 बजे निकलना था, लेकिन वह शाम 4:15 बजे पहुँची। आरोप था कि ड्राइवर नशे में था, बस की हालत जर्जर थी और सीटें टूटी हुई थीं। इसके अलावा, बस को गलत रास्ते (जेवर टोल) से ले जाया गया, जहाँ रात लगभग 12:00 बजे वह गंतव्य से 58 किमी पहले ही खराब हो गई। इसके परिणामस्वरूप, बारात सुबह 3:00 बजे विवाह स्थल पर पहुँची, जिससे शादी की रस्में प्रभावित हुईं।

पक्षों की दलीलें

विपक्षी दल (ट्रांसपोर्ट सर्विस) ने इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि यह मामला दीवानी अदालत (civil court) के अधिकार क्षेत्र का है। उन्होंने देरी के लिए शिकायतकर्ता को ही जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि बस समय पर पहुँची थी, लेकिन रिश्तेदारों के इंतजार में देरी हुई।

बस खराब होने पर ट्रांसपोर्टर ने दलील दी कि ड्राइवर शिकायतकर्ता के रिश्तेदार के निर्देशों का पालन कर रहा था, जिसने गूगल मैप्स के जरिए बस को “गड्ढों वाली कच्ची सड़क” पर डलवा दिया। ट्रांसपोर्टर का यह भी कहना था कि उन्होंने तुरंत मैकेनिक भेजा था, लेकिन शिकायतकर्ता ने इंतजार करने से मना कर दिया। साथ ही, वैकल्पिक बस के लिए किए गए ₹32,000 के भुगतान के दावों को सबूतों के अभाव में चुनौती दी गई।

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आयोग का विश्लेषण

आयोग ने ट्रांसपोर्टर की इस आपत्ति को खारिज कर दिया कि मामला दीवानी अदालत का है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह “सेवा में कमी” का मामला है जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत आता है। आयोग ने पाया कि ₹14,000 के भुगतान की बात निर्विवाद है और इसे स्वीकार करने के साथ ही अनुबंध (contract) प्रभावी हो गया था।

आयोग ने यह भी नोट किया कि ट्रांसपोर्टर यह साबित करने में विफल रहा कि बस समय पर पहुँची थी या खराब होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। पीठ ने टिप्पणी की:

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“समय पर सेवा देने में विफलता और बस खराब होने के बाद आकस्मिक व्यवस्था का अभाव, स्पष्ट रूप से विपक्षी दल की ओर से सेवा में कमी को दर्शाता है।”

शादी के समारोह में देरी के सामाजिक प्रभाव पर आयोग ने कहा:

“विवाह समारोह एक समयबद्ध आयोजन है। बारात के आगमन में देरी न केवल शिकायतकर्ता बल्कि दोनों परिवारों और मेहमानों के लिए असुविधा का कारण बनती है, जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक परिवेश में शर्मिंदगी, परेशानी और सम्मान की हानि होती है।”

हालांकि, आयोग ने शराब पीने या बस की खराब स्थिति के आरोपों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया। साथ ही, रसीदें न होने के कारण वैकल्पिक परिवहन के खर्च के दावे को भी स्वीकार नहीं किया गया।

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आयोग का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण बनाम बलबीर सिंह और चरण सिंह बनाम हीलिंग टच अस्पताल मामलों में तय सिद्धांतों का हवाला देते हुए, आयोग ने कहा कि मुआवजा “उचित और हुए नुकसान के अनुपात में” होना चाहिए।

आयोग ने विपक्षी दल को निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. ₹14,000 की वापसी: 8 दिसंबर, 2022 से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ।
  2. ₹50,000 का मुआवजा: मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और असुविधा के लिए।

आदेश के अनुसार, इन निर्देशों का पालन 30 दिनों के भीतर करना होगा। ऐसा न करने पर कुल ₹64,000 की राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देय होगा।

मामले का विवरण

  • केस का शीर्षक: कपिल कुमार बनाम लक्ष्मी टूरिस्ट कॉर्प एवं अन्य
  • केस संख्या: DC/77/CC/122/2024
  • पीठ: दिव्य ज्योति जयपुरियार (अध्यक्ष), डॉ. रश्मि बंसल (सदस्य)
  • दिनांक: 05.05.2026

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