दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित आबकारी नीति (Liquor Policy) मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को आरोपमुक्त (Discharge) किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर CBI की याचिका पर सुनवाई टाल दी है। कोर्ट अब इस मामले पर 11 मई को विचार करेगा। यह स्थगन मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेताओं के कानूनी प्रतिनिधित्व को अंतिम रूप देने के कारण लिया गया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक जैसे प्रमुख नेताओं के पक्ष को रखने के लिए वरिष्ठ वकीलों की औपचारिक सहमति का इंतज़ार किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने उल्लेख किया कि मामले से जुड़े तीन प्रमुख व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व अभी अदालत में दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अभी तीन लोग ऐसे हैं जिनका प्रतिनिधित्व तय नहीं है। मैं कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सहमति की प्रतीक्षा कर रही हूँ जो अदालत में उनका पक्ष रखेंगे।”
यह कानूनी प्रक्रिया उस याचिका पर आधारित है जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें AAP नेताओं को इस मामले में राहत दी गई थी।
अदालत ने कार्यवाही को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है:
- सोमवार (11 मई): जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा नेताओं के लिए कानूनी कौंसिल (Counsel) की नियुक्ति के संबंध में आवश्यक आदेश पारित करेंगी।
- मंगलवार: वकीलों की नियुक्ति के बाद, कोर्ट CBI की मुख्य याचिका पर विस्तार से दलीलें सुनना शुरू करेगा।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की कानूनी चुनौतियों से जुड़ा है।

