सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में बढ़ती रिक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र से मांगा जवाब, कहा— साल के अंत तक केवल 3 बेंच ही रह जाएंगी सक्रिय

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) में न्यायिक और प्रशासनिक पदों पर बढ़ती रिक्तियों पर गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की मांग की गई है ताकि न्यायाधिकरण को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सके।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने ‘सशस्त्र बल न्यायाधिकरण बार एसोसिएशन (रीजनल बेंच)’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से इस मुद्दे पर अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया है।

सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन के वकील ने न्यायाधिकरण के संचालन को लेकर चिंताजनक स्थिति पेश की। बेंच को बताया गया कि देशभर में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कुल 11 स्वीकृत बेंच हैं, लेकिन यदि रिक्त पदों को तुरंत नहीं भरा गया, तो इस साल के अंत तक इनमें से केवल 3 बेंच ही कार्यरत रह जाएंगी।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि बेंचों की संख्या में इतनी भारी कमी से सैन्य कर्मियों और पूर्व सैनिकों को न्याय मिलने में गंभीर बाधा आएगी। इससे सेवा से जुड़े मामलों और पेंशन विवादों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है।

याचिका में विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि केंद्र सरकार चयन प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करे। यह मांग सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 की धारा 5 के अनुपालन के लिए की गई है, जो न्यायाधिकरण और उसकी बेंचों के गठन व संरचना को निर्धारित करती है।

नई नियुक्तियों के अलावा, याचिका में न्यायाधिकरण की वर्तमान क्षमता को बनाए रखने के लिए अंतरिम उपाय का भी सुझाव दिया गया है। इसमें मांग की गई है कि जब तक नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान न्यायिक और प्रशासनिक सदस्यों को उनके पद पर बने रहने दिया जाए (बशर्ते वे इसके लिए सहमत हों)।

बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया है कि वे याचिका की एक प्रति अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को सौंपें ताकि सरकार का पक्ष स्पष्ट हो सके।

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सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में केंद्र सरकार रिक्त पदों को भरने की समय सीमा और वर्तमान सदस्यों के कार्यकाल विस्तार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी।

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