यूपी पंचायत चुनाव: इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश, राज्य निर्वाचन आयोग पेश करे विस्तृत चुनावी कार्यक्रम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी पंचायत चुनावों की पूरी समय-सारणी रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर संपन्न कराने की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को निर्देश दिया है कि वह पंचायत चुनावों के लिए एक विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। कोर्ट ने जोर दिया कि चुनाव प्रक्रिया को भारत के संविधान के अनुच्छेद 243E के अधिदेश के अनुरूप आयोजित किया जाना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्याूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव कार्यक्रम जारी करने की मांग वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि इसी तरह की राहत की मांग करने वाली एक अन्य याचिका, जिसे इम्तियाज हुसैन द्वारा दायर किया गया था, पहले से ही लंबित है और उस पर सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

दोनों याचिकाओं में एक ही तरह की मांग (पंचायत चुनावों के लिए एक पारदर्शी और निश्चित समय-सीमा) को देखते हुए, हाईकोर्ट ने वर्तमान याचिका को इम्तियाज हुसैन वाली याचिका के साथ संबद्ध करने का आदेश दिया।

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इस कानूनी चुनौती का मुख्य आधार भारत के संविधान का अनुच्छेद 243E है। यह अनुच्छेद प्रावधान करता है कि किसी भी पंचायत के गठन के लिए चुनाव उसका पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही संपन्न हो जाने चाहिए। उत्तर प्रदेश में जिला पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जिसका अर्थ है कि संवैधानिक रूप से चुनाव इस तारीख तक पूरे हो जाने चाहिए।

इससे पहले, इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था। आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि क्या वह 26 मई की समय-सीमा तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की स्थिति में है।

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याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि कार्यकाल समाप्त होने के करीब होने के बावजूद अभी तक कोई स्पष्ट चुनावी खाका नहीं है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी कर सकता है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को त्वरित कार्रवाई का निर्देश देते हुए कहा:

“प्रतिवादी संख्या 2 (राज्य निर्वाचन आयोग) से यह अपेक्षा की जाती है कि चुनाव कराने का पूरा कार्यक्रम अंतिम रूप दिया जाए और अगली सुनवाई की तारीख से पहले इसे रिकॉर्ड पर लाया जाए।”

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अदालत के इस निर्देश के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग को अगली सुनवाई में पंचायत चुनाव के विभिन्न चरणों के लिए एक स्पष्ट और चरणबद्ध समय-सीमा प्रस्तुत करनी होगी।

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