नीट (NEET) परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रियाओं पर सुप्रीम कोर्ट पूरे साल नजर रखेगा। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में केवल कंप्यूटर-आधारित परीक्षा या डिजिटल माध्यम अपनाने से पेपर लीक का खतरा खत्म नहीं होगा। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार को परीक्षा सुरक्षा, साइबर प्रोटोकॉल और एजेंसी के पुनर्गठन को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
स्थायी संस्थागत सुधारों पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थ और अस्थायी उपायों पर चिंता व्यक्त की। पीठ ने टिप्पणी की कि प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए भारतीय वायु सेना की मदद लेना एक तात्कालिक व्यवस्था है, जो प्रणाली की बुनियादी कमियों को दूर नहीं करती। अदालत ने कहा कि वह सिर्फ सुधारों की शुरुआत ही नहीं देखेगी, बल्कि पूरे साल यह सुनिश्चित करेगी कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से संस्थागत रूप दिया जाए।
गवर्निंग बोर्ड और विशेषज्ञों की भूमिका
अदालत ने केंद्र सरकार को अपने आगामी हलफनामे में यह स्पष्ट करने को कहा कि 2024 में पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के तहत क्या कदम उठाए गए हैं। पीठ ने विशेष रूप से एनटीए के गवर्निंग बोर्ड के पुनर्गठन, बोर्ड में नामांकन, पारदर्शिता और हितधारकों के प्रतिनिधित्व का ब्योरा मांगा। इसके साथ ही, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और केंद्रीय विद्यालय संगठन के विषय विशेषज्ञों को प्रक्रिया में शामिल करने के संबंध में हुई प्रगति की जानकारी भी मांगी गई है।
डिजिटल सुरक्षा और साइबर जोखिम
परीक्षा को डिजिटल माध्यम या कंप्यूटर-आधारित टेस्ट पर स्थानांतरित करने की योजना पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने डेटा सुरक्षा पर सवाल उठाए। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यदि प्रश्नपत्रों के डिजिटल हस्तांतरण और एन्क्रिप्शन के दौरान सख्त डेटा सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो साइबर सेंधमारी से पूरी प्रणाली चरमरा सकती है। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अब तक किसी भी तरह के साइबर उल्लंघन की घटना नहीं हुई है, फिर भी सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर पूरी सावधानी बरत रही है।
सरकार की प्रतिबद्धता और राजनीतिक हलचल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से विस्तृत हलफनामा दायर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को स्वीकार करने के साथ-साथ उनसे आगे जाकर भी सुरक्षा उपाय लागू कर रही है और यह मामला शीर्ष स्तर पर कार्यपालिका की सीधी निगरानी में है।
यह सुनवाई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा पेपर लीक के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई। सुनवाई से एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी करते हुए पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का ऐलान किया था।

