कलकत्ता हाईकोर्ट ने सेना भर्ती की प्रक्रिया में शामिल एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को उसे प्रोविजनल (अस्थाई) डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है। मतदाता सूची से नाम कट जाने के कारण इस अभ्यर्थी की भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक गई थी और सितंबर में होने वाली शारीरिक परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) से बाहर होने का खतरा बन गया था।
जस्टिस कृष्णा राव ने 3 सितंबर को दिए अपने आदेश में बशीरहाट के सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता सौरव सरकार वोटर लिस्ट से नाम कटने के अलावा अन्य सभी निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो उसे तत्काल प्रोविजनल डोमिसाइल प्रमाणपत्र मुहैया कराया जाए। अदालत के इस हस्तक्षेप से अभ्यर्थी को चयन प्रक्रिया से अयोग्य घोषित होने से बचा लिया गया है।
शारीरिक परीक्षा के लिए दी गई सशर्त अनुमति
सौरव सरकार सेना भर्ती की प्राथमिक चयन प्रक्रिया पहले ही पास कर चुके हैं और शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों में शामिल हैं। हालांकि, रक्षा भर्ती नियमों के तहत आगामी शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग लेने के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य शर्त है। यह परीक्षा इसी सितंबर महीने में प्रस्तावित है।
अदालत ने डोमिसाइल से जुड़े विवाद के लंबित रहने तक अभ्यर्थी को यह राहत सशर्त प्रदान की है। सौरव सरकार को एक हलफनामा (अंडरटेकिंग) जमा करना होगा, जिसमें यह वचन देना होगा कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ उसकी अपील खारिज हो जाती है, तो वह परिणाम आने के एक सप्ताह के भीतर यह अस्थाई प्रमाणपत्र अधिकारियों को वापस सौंप देगा।
अपीलीय न्यायाधिकरण को जल्द फैसला करने का निर्देश
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता आसिफ दीवान और मेहदी मसूद ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर ही स्थानीय प्रशासन ने सौरव को डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया था। वकीलों ने अदालत से आग्रह किया कि लंबित अपील का निपटारा जल्द कराया जाए, ताकि अभ्यर्थी समय पर अपने कागजात जमा कर शारीरिक परीक्षा में शामिल हो सके।
दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सौरव के मामले की सुनवाई कर रहे अपीलीय न्यायाधिकरण को निर्देश दिया कि वह इस अपील पर बिना किसी देरी के निर्णय ले। अदालत ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेने को कहा है।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील डी. एन. रे और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की तरफ से अधिवक्ता अनामिका पांडे पेश हुईं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण की पृष्ठभूमि
यह न्यायिक निर्देश राज्य में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विवादों की व्यापक पृष्ठभूमि के बीच आया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों से मंजूरी मिलने के बाद लगभग 1,468 नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े गए थे। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता अब भी न्यायाधिकरणों का रुख कर रहे हैं जिनके नाम मतदाता सूची से बाहर हैं और वे अपनी पहचान व मताधिकार बहाल कराने के लिए कानूनी प्रयास कर रहे हैं।

