‘डिजिटल अरेस्ट’ पर बड़ी कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश, व्हाट्सएप ने 9,400 अकाउंट्स किए बैन; ₹10 करोड़ से अधिक की ठगी पर CBI की नज़र

देश में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक विस्तृत रणनीति से अवगत कराया है। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि व्हाट्सएप, आरबीआई, दूरसंचार विभाग (DoT) और सीबीआई मिलकर इन घोटालों पर नकेल कस रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सएप ने अब तक इस अपराध में शामिल 9,400 अकाउंट्स को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा, संदिग्ध सिम कार्डों को चिह्नित होने के महज 2 से 3 घंटे के भीतर ब्लॉक करने के लिए एक सख्त तंत्र पर काम किया जा रहा है।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 फरवरी को जारी किए गए निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया था। कोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि आरबीआई और दूरसंचार विभाग जैसे सभी हितधारक मिलकर पीड़ितों को मुआवजा देने और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करें।

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‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत जालसाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को उनके घरों में ही बंधक जैसा बना देते हैं और जांच के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली करते हैं।

महान्यायवादी (अटार्नी जनरल) आर. वेंकटरमणी के माध्यम से दाखिल इस ताजा रिपोर्ट में व्हाट्सएप द्वारा पिछले 12 हफ्तों में की गई कार्रवाई का विवरण दिया गया है। व्हाट्सएप ने भारतीय उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने वाले इन स्कैम्स की पहचान के लिए जनवरी 2026 में एक विशेष जांच शुरू की थी।

सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए व्हाट्सएप निम्नलिखित तकनीकी उपायों पर विचार कर रहा है:

  • लोगो डिटेक्शन: पुलिस या सरकारी संस्थाओं के आधिकारिक प्रतीकों (Insignia) का उपयोग करने वाले संदिग्ध अकाउंट्स की स्वचालित पहचान कर उन्हें हटाना।
  • कॉलर चेतावनी: यदि कॉल किसी ‘नए’ या ‘बिना पहचान वाले’ अकाउंट से आती है, तो उपयोगकर्ता को सचेत करना।
  • प्रोफाइल पिक्चर छिपाना: अज्ञात और संदिग्ध कॉल आने पर प्रोफाइल फोटो को स्वचालित रूप से छिपा देना, ताकि जालसाज वर्दी या आधिकारिक पद का रौब न झाड़ सकें।
  • सिम-बाइंडिंग (SIM-Binding): एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था जिसमें ऐप तभी चलेगा जब केवाईसी-सत्यापित सिम कार्ड शारीरिक रूप से फोन में मौजूद हो। सिम हटाने या बदलने पर ऐप काम करना बंद कर देगा।
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STATUS रिपोर्ट में बताया गया कि सीबीआई ने अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े उन मामलों की जांच अपने हाथ में लेने का फैसला किया है जिनमें ठगी की राशि ₹10 करोड़ से अधिक है। वर्तमान में, सीबीआई ने दिल्ली में ₹22.92 करोड़ की धोखाधड़ी सहित गुजरात के दो बड़े वित्तीय अपराधों के मामलों को फिर से दर्ज किया है।

वहीं, आरबीआई ने बैंकों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। इसके तहत ‘मनी म्यूल्स’ (वह लोग जो जालसाजों को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देते हैं) की गतिविधियों को रोकने के लिए संदिग्ध लेनदेन पर अस्थायी रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि दूरसंचार विभाग को ‘बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली’ (BIVS) जल्द लागू करने का निर्देश दिया जाए। दिसंबर 2026 तक लागू होने वाली इस प्रणाली से सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा सकेगी।

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इसके साथ ही, एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति ने दूरसंचार ऑपरेटरों और डिजिटल प्लेटफार्मों के साथ मिलकर ‘टेलीकम्युनिकेशंस (यूजर आइडेंटिफिकेशन) रूल्स’ को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है ताकि साइबर अपराधियों तक सिम कार्ड की पहुंच को खत्म किया जा सके।

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