दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के आरोपी और पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

बुधवार को जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधुन जैन की अवकाशकालीन पीठ (वैकेशन बेंच) ने दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। हुसैन ने निचली अदालत के 29 जनवरी के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें इस साजिश से जुड़े मामले में नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है। इसके साथ ही, अदालत ने हुसैन की उस अर्जी पर भी पुलिस को जवाब देने का समय दिया है जिसमें अपील दाखिल करने में हुई 87 दिनों की देरी को माफ करने का अनुरोध किया गया है। पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कोर्ट से जवाब तैयार करने के लिए समय देने की मांग की थी।

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ट्रायल कोर्ट का फैसला

निचली अदालत ने 29 जनवरी को अपने आदेश में ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पिछले न्यायिक आदेशों में उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) मामला बनता हुआ पाया गया है।

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43D के तहत, किसी भी आरोपी को तब तक जमानत नहीं दी जा सकती जब तक कि अदालत पुलिस रिपोर्ट या केस डायरी का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर न पहुंचे कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप पहली नजर में सही प्रतीत होते हैं।

साजिश से जुड़े मामले की पृष्ठभूमि

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ताहिर हुसैन और कई अन्य लोगों पर फरवरी 2020 के दंगों का मुख्य सूत्रधार होने के आरोप में इस आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़की इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

इस बड़ी साजिश के मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। हुसैन के अलावा शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद जैसे कार्यकर्ताओं पर भी इस साजिश में कथित भूमिका के लिए मामला दर्ज किया गया है।

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दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन के संबंध कार्यकर्ता उमर खालिद और खालिद सैफी से होने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी उस बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे जो राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन कर रहा था। पुलिस जांचकर्ताओं ने हुसैन के घर से दंगे में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद करने की बात कही थी, जिसमें तीन गुलेल, बड़ी मात्रा में ईंट-पत्थर और कांच की बोतलों से भरे कबाड़ के कतरे मिले थे, जिनमें ज्वलनशील तरल भरकर कपड़े ठूंसे गए थे ताकि उन्हें पेट्रोल बम (मोलोटोव कॉकटेल) की तरह इस्तेमाल किया जा सके।

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