दहेज उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बेरहम व्यक्ति रहम लायक नही

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दहेज प्रताड़ना के मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पति की अग्रिम जमानत को खारिज करते हुए कहा कि बेरहम आदमी रहम के लायक नही होते। 

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इस मायने में अहम है क्योंकि आरोपी पति का पक्ष बेहद मजबूत था। और उम्मीद थी कि उसे जमानत मिल जाएगी। हालांकि सीजेआई बोबडे की पीठ ने पूर्ण रूप से महिला के आरोपों का समर्थन किया। 

सूत्रों के अनुसार आरोपी पति न दावा ठोका है कि उसकी पत्नी ने उससे अलग रहने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति के साथ अपनी न्यूड फोटोग्राफ उसे भेजी थी। इसी को लेकर जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो उल्टा पत्नी ने उस पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगा दिया।

पति के पक्षकार वकील ने कोर्ट को बताया कि जब महिला अपने पति से अलग रहती थी। उस वक्त उसने दूसरे व्यक्ति के साथ सैकड़ों नग्न फोटो भेजी । उसके बाद महिला ने दहेज उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। जबकि दहेज के नाम पर न तो एक भी रुपया लिया गया न तो मांगा गया था। वकील ने कहा कि महिला का आरोप एकतरफ है।

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पीठ ने आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यदि महिला ने किसी ओर आदमी के साथ नग्न तस्वीर भेजी तो आप उसे तलाक भी दे सकते है। लेकिन आप उसके साथ क्रुर नही हो सकते हैं। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर में आरोप हमेशा एकतरफा ही होते हैं। ऐसी कोई प्राथमिकी नही होते जिसमे शिकायतकर्ता और आरोपी साथ मे दर्ज करवाएं।

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