शादी का झूठा वादा नही किया- सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म का मुकदमा खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ दुष्कर्म का मामला यह देखते हुआ खारिज कर दिया कि पीड़िता ने स्वम स्वीकार किया कि उसने सहमति से संबंध बनाए थे और ऐसा कोई प्रमाण नही मिला कि प्रारम्भ से शादी का झूठा वादा किया गया था।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सोनू उर्फ सुभाष की 26 सितंबर 2019 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध अपील को स्वीकारते हुए पीठ ने कहा कि ऐसा आरोप नही था कि शिकायतकर्ता से शादी करने का वादा शुरू में झूठा था। 

गौरतलब है कि सात फरवरी 2018 को मथुरा में दर्ज प्राथमिकी सामग्री से साफ है कि उस व्यक्ति द्वारा बाद में लड़की से शादी करने से मना किया गया था। जिसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया।

एफआईआर और न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने शिकायतकर्ता के बयान पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट कहा कि इसमें कोई संदेह नही है कि उनके बीच आपसी सहमति से संबंध बनाया गया था और उनके मध्य लगभग डेढ़ वर्ष तक संबंध थे।

व्यक्ति ने उससे शादी करने में असमर्थता जताई जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज हुई।

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