वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कम थी ब्राइटनेस सीजेआई बोले इसे बढ़ाए अंधेरे में नही रख सकते सुप्रीम कोर्ट को

नई दिल्ली- कोरोना महामारी का खतरा अभी टला नही है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ज्यादातर मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई कर रहा है ऐसे में कोर्ट के समक्ष ऐसे वाकये सामने आ चुके हैं।

हालांकि जायज इसे हंसी में टाल देते हैं । ऐसा ही एक केस जब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया जब मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम दिखी इस पर उन्होंने स्टाफ को स्क्रीन की रोशनी को बढ़ाने के निर्देश दिये । जिससे कोर्ट रूम में हंसी का माहौल बन गया।

सीजेआई एस ए बोबडे ने सुनवाई के दौरान ही स्टाफ को स्क्रीन की ब्राइटनेस बढ़ाने के लिए निर्देश दिए साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में नही रखा जा सकता सीजेआई की इस टिप्पणी से कोर्ट का माहौल हल्का हो गया। आपको  बता दें कि जजों के मध्य हंसी मजाक का यह पहला किस्सा नही है। आमतौर पर माहौल को हल्का करने के लिए जज और वकील ह्यूमर का प्रयोग करते हैं। 

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इससे पूर्व में सीजेआई बोबडे ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी से पूछा था कि क्या वह किसी म्यूजियम में बैठे हैं? क्योंकि पीछे काफी मूर्तियों और स्टेच्यू दिखाई दे रहे थे। इस पर मुकुल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अपने फार्महाउस में बैठे है। अनलॉक के कारण फार्म में आ गए हैं। ताकि दिन में दो बार स्विमिंग का मजा ले सके।

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