3 लाख रुपये के स्थायी गुजारे भत्ते पर समझौता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति और ससुराल वालों पर दर्ज आपराधिक केस रद्द किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक पति और उसके परिजनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को निरस्त कर दिया है। यह आदेश अलग रह रहे दंपती के बीच 13 लाख रुपये के एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ते पर आपसी सुलह होने के बाद आया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को बेवजह खींचते रहने से सभी पक्षों की मानसिक परेशानियां ही बढ़ेंगी और बिना किसी सार्थक नतीजे के अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ेगा।

जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने 9 सितंबर को जारी अपने आदेश में कहा कि जब दोनों पक्ष विवाद खत्म करने पर सहमत हो चुके हैं, तब इस स्तर पर मुकदमा रद्द करने की अर्जी खारिज करना उल्टा नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने पाया कि मामले को आगे जारी रखने से किसी ठोस परिणाम की उम्मीद नहीं है, इसलिए इसे खत्म करना ही न्यायसंगत है।

तीन किस्तों में तय हुआ भुगतान

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दंपती के बीच हुए समझौते के अनुसार 13 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता तीन किस्तों में दिया जाना है।

हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक पति पहली किस्त के तौर पर 3 लाख रुपये पहले ही अदा कर चुका है। तय शर्तों के तहत दूसरी किस्त की रकम वर्तमान आपराधिक मामले और घरेलू हिंसा अधिनियम (डीवी एक्ट) के तहत विचाराधीन कार्यवाही को वापस लेने के बाद दी जाएगी। वहीं, बाकी बची 7 लाख रुपये की अंतिम किस्त आपसी सहमति से तलाक के मुकदमे की आखिरी सुनवाई के दिन सौंपी जाएगी।

परिजनों की मध्यस्थता से सुलझा विवाद

यह कानूनी टकराव दांपत्य विवाद के बाद शुरू हुआ था। पत्नी ने पति और उसके परिवार के सदस्यों पर दहेज की मांग, शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना और अमानत में खयानत के आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके आधार पर साल 2019 में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

बाद में परिजनों और शुभचिंतकों की पहल पर दोनों पक्षों ने अपने गिले-शिकवे दूर कर लिए। इसके बाद दोनों ने आपसी रजामंदी से अलग होने का निर्णय लिया और अदालत में पारस्परिक सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल की।

सुनवाई के दौरान पति की ओर से पेश अधिवक्ता सुतपा सान्याल ने बताया कि दोनों पक्ष एकमुश्त भत्ते पर राजी होकर विवाद को सुलझा चुके हैं। वहीं, पत्नी के वकील सनत कुमार दास ने अदालत को अवगत कराया कि उनकी मुवक्किल ने समझौता कर लिया है, वह पूर्व में लगाए गए आरोपों को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं और यदि यह आपराधिक मामला रद्द किया जाता है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है।

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राज्य सरकार ने भी नहीं जताया कोई ऐतराज

राज्य सरकार की तरफ से भी इस आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने पर कोई विरोध नहीं किया गया। राज्य के अधिवक्ता राजदीप बिस्वास ने पीठ को बताया कि जांच प्रक्रिया के दौरान चार गवाहों से पूछताछ की गई थी और जब्त किया गया स्त्रीधन पहले ही पत्नी को लौटाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि यह विवाद पूरी तरह से निजी और पारिवारिक है, जिसमें व्यापक जनहित या लोक नीति का कोई मुद्दा शामिल नहीं है। इसलिए सरकार को इस समझौते के आधार पर मुकदमा बंद किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है।

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