सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब पुलिस के निलंबित उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरचरण सिंह भुल्लर की दूसरी जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत में अहम अभियोजन गवाहों की गवाही दर्ज होने के बाद ही इस याचिका पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान पीठ ने भुल्लर को राहत देने के प्रति कड़ा रुख दिखाया। चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता के वकील से मुखातिब होते हुए दो टूक कहा कि यह सौ फीसदी खारिज होने वाला केस है और वे इसे अभी खारिज करवाना चाहते हैं या बाद में। अदालत के इस कड़े रुख के बीच भुल्लर के वकील ने बताया कि कुछ लोगों के बयान तो दर्ज हो चुके हैं, लेकिन शिकायतकर्ता और कई महत्वपूर्ण गवाहों से ट्रायल कोर्ट में पूछताछ होना अभी बाकी है। इस दलील को ध्यान में रखते हुए पीठ ने सुनवाई चार हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।
निचली अदालत में अहम गवाहों के बयानों का इंतजार
सुनवाई के दौरान पीठ का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि जब तक शिकायतकर्ता और अन्य अहम गवाह अदालत में पेश होकर अपने बयान दर्ज नहीं करा लेते, तब तक जमानत पर विचार करना उचित नहीं होगा। शीर्ष अदालत ने मामले की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अहम गवाहों की गवाही पूरी होने तक इंतजार करने का फैसला किया।
हाईकोर्ट और विशेष सीबीआई अदालत से पहले लग चुका है झटका
भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 10 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। तब अदालत ने उन्हें यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वे दोबारा हाईकोर्ट जा सकते हैं। वहीं, जनवरी में चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने भी भुल्लर को जमानत देने से साफ मना कर दिया था।
रोपड़ रेंज में तैनाती और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
यह विवाद पिछले साल अक्टूबर में सामने आई एक शिकायत से जुड़ा है। उस समय भुल्लर रोपड़ रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने सरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में अनुकूल व्यवहार और राहत देने के बदले एक निजी बिचौलिए के जरिए घूस की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर पिछले साल 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया। इस कार्रवाई के दौरान एक सह-आरोपी को रिश्वत की तय रकम में से पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया, जिसके चलते उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था।

