सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि विभिन्न अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में रिक्तियों की वजह से न्यायिक कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि जब तक रिक्त पदों पर नई भर्तियां पूरी नहीं हो जातीं, तब तक सेवानिवृत्त हो रहे पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों के कार्यकाल को करीब एक महीने के लिए तदर्थ (एडहॉक) आधार पर आगे बढ़ाने पर विचार किया जाए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कामकाज को निर्बाध रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप भी किया। पीठ को अवगत कराया गया था कि एनजीटी के तीन सदस्यों—दो न्यायिक और एक तकनीकी—के पदमुक्त होने से पर्यावरण अधिकरण के संचालन पर गंभीर असर पड़ेगा। इस पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने अंतरिम उपाय के तहत इन तीनों सदस्यों का कार्यकाल तब तक के लिए बढ़ा दिया, जब तक कि उनके पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं।
केंद्र ने तदर्थ विस्तार का किया विरोध
यह मुद्दा डेट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) सहित कई अर्ध-न्यायिक निकायों में रिक्तियों और सदस्यों के आगामी दिनों में सेवानिवृत्त होने को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठा।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने तदर्थ सेवा विस्तार की अर्जियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2026 के तहत नई नियुक्तियों की कवायद पहले ही शुरू कर दी गई है। शीर्ष विधि अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम याचिकाओं पर विचार न करने का अनुरोध करते हुए तर्क दिया कि एक या दो महीने के इस अंतर से संस्थागत कामकाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
अदालत ने मांगी स्पष्ट समयसीमा
पीठ ने सरकार के रुख पर चिंता जताते हुए कहा कि वह अधिकरणों को निष्क्रिय नहीं होने देना चाहती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या केंद्र अपने स्तर पर यह फैसला ले सकता है कि तदर्थ व्यवस्था को एक महीने या कुछ समय के लिए आगे बढ़ा दिया जाए।
सीजेआई ने सरकार से नियुक्तियों को लेकर एक तय समयसीमा और निश्चित जवाब की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नई नियुक्तियां किए बिना इन याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया, तो मुकदमों का एक नया सिलसिला शुरू हो जाएगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को तदर्थ रूप में जारी रखा जा सकता है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की है।
2026 के नए कानून के तहत प्रक्रिया और पृष्ठभूमि
देशभर के अन्य ट्रिब्यूनलों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 2026 के नए कानून के प्रावधानों के मुताबिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में कतई देरी न की जाए।
इस मामले में 8 सितंबर को केंद्र सरकार ने पीठ को सूचित किया था कि ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2026 की धारा 24 के तहत विभिन्न अधिकरणों के 248 सदस्य सेवा विस्तार के पात्र पाए गए हैं और उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। पीठ ने रिकॉर्ड पर लिया था कि ये पात्र सदस्य नए कानून में निर्धारित पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने अथवा अधिकतम आयु सीमा तक अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 19 मई को एक आदेश जारी कर उन सभी ट्रिब्यूनल अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ा दिया था, जिनका कार्यकाल उससे पहले समाप्त हो रहा था, ताकि न्यायाधिकरणों में कामकाज ठप न पड़े।

