त्यागराज स्टेडियम विवाद: आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी रिंकू दुग्गा को सेवा में बहाल करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। केंद्र सरकार ने दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (कंपलसरी रिटायरमेंट) दे दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए 7 सितंबर को रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया। पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि मामले के लंबित रहने तक अधिकारी की बहाली पर रोक रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। शीर्ष अदालत में केंद्र सरकार का पक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने रखा।

हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के पिछले फैसले

इससे पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों ने रिंकू दुग्गा के पक्ष में फैसला सुनाया था। केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के बाद दुग्गा ने कैट का दरवाजा खटखटाया था, जहां ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें बहाल करने का निर्देश दिया था।

केंद्र सरकार ने अधिकरण के इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को दिए अपने निर्णय में कैट के रुख को सही ठहराया था और केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज कर दिया था।

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सर्विस रिकॉर्ड की अनदेखी पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र के निर्णय को रद्द करते हुए माना था कि स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा समय से पूर्व सेवानिवृत्ति की सिफारिश नियमों के अनुकूल नहीं थी। अदालत ने रेखांकित किया था कि समीक्षा समिति ने दुग्गा के बेहतरीन सर्विस रिकॉर्ड की अनदेखी की। उनके वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं थी, पिछले वर्षों में उन्हें उत्कृष्ट (आउटस्टैंडिंग) रेटिंग मिली थी और उस समय उनके प्रमोशन पर भी विचार चल रहा था।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान प्रशासन से निष्प्रभावी या ‘डेडवुड’ हो चुके कर्मचारियों को हटाने के लिए होता है, और यह सिद्धांत रिंकू दुग्गा के मामले में लागू नहीं होता।

कुत्ता टहलाने से उपजा था विवाद

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यह पूरा मामला 2022 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम से जुड़े एक चर्चित घटनाक्रम से जुड़ा है। उस दौरान मीडिया रिपोर्टों और तस्वीरों में सामने आया था कि रिंकू दुग्गा और उनके आईएएस पति के कुत्ता टहलाने के लिए एथलीटों को समय से पहले स्टेडियम खाली करने को कहा गया था। इस घटना पर भारी जनआक्रोश देखने को मिला था।

इसके बाद विभागीय जांच में दुग्गा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए एक मामूली जुर्माना लगाया गया था। बाद में केंद्र सरकार ने इसी स्टेडियम कांड और अनधिकृत अनुपस्थिति के एक अन्य आरोप का हवाला देते हुए उन्हें सिविल सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश जारी किया था।

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