राशन सूची से नाम कटने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का अंतरिम रोक से इनकार, यूनियन को लगाई फटकार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के राशन और नकद लाभ बंद करने के सरकारी फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाली खेतिहर मजदूरों की यूनियन को फटकार लगाते हुए कहा कि जिस नीति का वे विरोध कर रहे हैं, उससे पीड़ित किसी भी व्यक्ति ने अब तक अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है।

डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के समक्ष एक भी ऐसी शिकायत नहीं आई है जिसमें किसी ने अपने सामाजिक-आर्थिक अधिकारों से वंचित किए जाने का दावा किया हो। अदालत ने कहा कि संगठन व्यापक स्तर पर लोगों को लाभ से वंचित किए जाने का दावा कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति ने अपनी शिकायत लेकर अदालत से संपर्क नहीं किया है।

राज्य सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया का किया बचाव

यह पूरा विवाद सरकार के उस फैसले से जुड़ा है जिसके तहत हाल ही में संपन्न हुए ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान के बाद मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों को राशन लाभ से भी वंचित किया जा रहा है। पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति और उसके राज्य समिति के एक सदस्य ने इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है।

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता सुरजीत नाथ मित्रा ने किसी भी तरह के अंतरिम आदेश का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से आधिकारिक जांच पर आधारित है। सरकार के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मृत पाया जाता है या अद्यतन मतदाता सूची से उसका नाम गायब है, तो उसे कल्याणकारी योजनाओं की सूची से हटाना आवश्यक है। प्रशासन ने इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा, जिसे मंजूर कर लिया गया।

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यूनियन ने दी बड़े पैमाने पर नुकसान की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता पुरबायन चक्रवर्ती ने अदालत से आग्रह किया कि वह लाभार्थी सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाए। उन्होंने दलील दी कि इस नीति के कारण राज्य भर के लाखों हाशिए पर रहने वाले नागरिक अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं और उन्हें भोजन तथा नकद सहायता मिलनी बंद हो रही है।

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सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली थी राहत

हाईकोर्ट का यह रुख यूनियन के लिए एक और झटके की तरह है। इससे पहले संगठन ने इस नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए उन्हें राहत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था।

चूंकि हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी है, इसलिए संशोधित मतदाता सूची के आधार पर कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता तय करने की राज्य की प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

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