दारा सिंह की रिहाई याचिका: सुप्रीम कोर्ट की ओडिशा सरकार को दो टूक, 17 सितंबर तक फैसला न होने पर सचिव होंगे तलब

सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों के हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की अर्जी पर निर्णय न लेने को लेकर ओडिशा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 17 सितंबर की अगली सुनवाई तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया, तो वह राज्य के शीर्ष अधिकारियों और गृह सचिव को सीधे अदालत में तलब करेगा।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत मांगे जाने की अर्जी को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यह मामला दो साल से अधिक समय से लंबित है और इसे इस तरह अनिश्चितकाल के लिए लटका कर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस अर्जी को खारिज करती है, तो दोषी के पास उसे आगे चुनौती देने का कानूनी विकल्प रहेगा, और यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो अदालत में चल रही यह याचिका स्वतः ही निष्प्रभावी हो जाएगी।

लगातार टालमटोल पर अदालत की सख्त टिप्पणी

मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही ओडिशा सरकार के वकील ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के अस्वस्थ होने और अब तक आवश्यक निर्देश न मिल पाने का हवाला देते हुए चार सप्ताह का समय मांगा।

जस्टिस मिश्रा ने इस दलील को नकारते हुए याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में भी सरकार ने इसी तरह का स्थगन मांगा था। पीठ ने अपने 29 अगस्त के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड) को निर्देश दिया गया था कि वह 2 सितंबर तक याचिका पर निर्णय लेकर अदालत को सूचित करे। अदालत ने सवाल उठाया कि इस मामले को बार-बार क्यों टाला जा रहा है। जस्टिस मिश्रा ने सख्त लहजे में कहा कि वकील तुरंत आवश्यक निर्देश प्राप्त करें अन्यथा अदालत राज्य के सचिव को तलब करने पर विवश होगी। उन्होंने कहा कि सरकार मामले को अनावश्यक रूप से टालने के बजाय फैसला ले; यदि अर्जी खारिज करनी है तो खारिज कर दे, अदालत उसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया देखेगी।

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26 साल से अधिक समय से जेल में बंद है दोषी

दारा सिंह ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की 1999 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहा है।

उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि वह 26 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद है, इसलिए ओडिशा सरकार की सक्षम समिति को उसकी समय पूर्व रिहाई के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर 8 जुलाई 2024 को औपचारिक नोटिस जारी किया था।

जेल रिपोर्ट के अभाव में लंबित रही समीक्षा

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इस मामले में हाल के हफ्तों में लगातार प्रक्रियात्मक देरी देखने को मिली है। 19 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान भी पीठ ने रेखांकित किया था कि सरकार को निर्णय लेने का अवसर देने के उद्देश्य से इस मामले को बार-बार स्थगित किया गया है। उस समय राज्य के वकील ने ओडिशा कारागार एवं सुधार सेवा निदेशालय का एक पत्र अदालत में प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा गया था कि क्योंझर (केंदुझर) जिला जेल से रिपोर्ट प्राप्त न हो पाने के कारण राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की प्रक्रिया अधूरी रह गई थी।

अदालत द्वारा तय की गई पिछली समयसीमा तक भी जब बोर्ड का कोई निर्णय सामने नहीं आया, तो सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 17 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस तारीख के बाद सरकार को कोई और अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

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