केरल के एर्नाकुलम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कतर एयरवेज पर सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 10.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एयरलाइन ने एक दंपति के दो नाबालिग बच्चों को विमान में चढ़ने से रोक दिया था, जिसके कारण माता-पिता को मजबूरी में अपने बच्चों को भारत में ही छोड़कर वापस इटली लौटना पड़ा था।
उपभोक्ता आयोग ने कतर एयरवेज को आदेश दिया है कि वह पीड़ित परिवार को मानसिक प्रताड़ना और कष्ट के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा और अदालती खर्च के रूप में 25,000 रुपये का भुगतान करे। आयोग के अध्यक्ष डी. बी. बीनु और सदस्य रामचंद्रन वी तथा श्रीविद्या टी. एन. की पीठ ने यह फैसला सुनाया। एयरलाइन को यह राशि 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। ऐसा न करने पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से लेकर भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज देना होगा।
कोच्चि हवाई अड्डे पर शुरू हुई परेशानी
यह पूरा मामला साल 2018 के अंत का है। इटली में काम करने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ वेनिस से कोच्चि (वाया दोहा) की यात्रा के लिए कतर एयरवेज से टिकट बुक किए थे। भारत आते समय एयरलाइन ने सभी दस्तावेजों की जांच की और उन्हें बोर्डिंग पास जारी कर दिए, जिससे उनकी यात्रा बिना किसी रुकावट के पूरी हो गई।
परेशानी 3 दिसंबर 2018 को वापसी यात्रा के दौरान कोच्चि हवाई अड्डे पर शुरू हुई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एयरलाइन कर्मचारियों ने उन्हें करीब ढाई घंटे तक इंतजार कराया और इसके बाद यह कहते हुए बड़े बच्चे को विमान में चढ़ने से रोक दिया कि उसके पास स्वतंत्र इटली वीजा नहीं है। अपनी नौकरी बचाने के लिए माता-पिता को मजबूरी में अपने बड़े बेटे को केरल में रिश्तेदारों के पास छोड़ना पड़ा। इसके बाद दंपति अपनी नवजात बच्ची (जो मां का दूध पीती थी) को लेकर विमान में सवार हो गए।
दोहा में भी रोका गया, परिवार हुआ अलग-अलग
पीड़ित परिवार की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। दोहा में कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ते समय एयरलाइन कर्मियों ने उन्हें फिर से रोक दिया। इस बार उन्होंने नवजात बच्ची के यात्रा दस्तावेजों पर आपत्ति जताई, जबकि कोच्चि में ही बच्ची का बोर्डिंग पास जारी हो चुका था।
परिवार को दोहा हवाई अड्डे पर करीब 10 घंटे तक इंतजार कराया गया और अंततः बच्ची को यात्रा की अनुमति देने से मना कर दिया गया। मजबूरी में मां को अकेले इटली जाना पड़ा, जबकि पिता बच्ची को लेकर वापस कोच्चि लौट आए। इसके बाद पिता ने बड़े बेटे के लिए अलग से वीजा का इंतजाम किया और उसे इटली ले गए, जबकि नवजात बच्ची को कुछ समय के लिए भारत में रिश्तेदारों के पास ही छोड़ना पड़ा।
एयरलाइन का तर्क और आयोग की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कतर एयरवेज ने दलील दी कि यात्रा और ट्रांजिट के लिए वैध वीजा और दस्तावेज सुनिश्चित करना यात्रियों की अपनी जिम्मेदारी है।
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन के इस तर्क को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई भी एयरलाइन आने वाली यात्रा के लिए जिन दस्तावेजों को स्वीकार कर बोर्डिंग पास जारी करती है, उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वापसी की यात्रा से इनकार नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि एयरलाइन के इस गलत रवैये के कारण माता-पिता को अपनी दूधमुंही बच्ची और बड़े बच्चे से अलग होना पड़ा, जिससे उन्हें भारी मानसिक और भावनात्मक आघात पहुंचा।
उपभोक्ता सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर
उपभोक्ता अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उपभोक्ता हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। केरल के उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-425-1550 पर या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के नंबर 1915 पर कॉल कर सहायता प्राप्त की जा सकती है।

