कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की सीबीआई और ईडी जांच की मांग वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की गई है। जस्टिस आर. एस. चौहान और जस्टिस बी. आर. सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को इस आपराधिक रिट याचिका पर बंद कमरे (इन-कैमरा) में दो घंटे तक सुनवाई की।
खबर लिखे जाने तक सोमवार की सुनवाई का आधिकारिक आदेश हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो सका था, लेकिन केस स्टेटस में मामले को 20 अगस्त के लिए सूचीबद्ध दिखाया गया है।
यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने अपनी घोषित आय से अधिक संपत्ति जमा की है, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए।
केंद्रीय एजेंसियों से मांगा गया है जवाब
मामले में 12 मई को हुई बंद कमरे की पिछली सुनवाई का आदेश 14 मई को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर जारी किया गया था। अपने उस आदेश में पीठ ने कहा था कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है, तो उस पर कानून के अनुसार सत्यापन किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सीबीआई या ईडी नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया था कि उसे शिकायत मिल गई है और वह आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी। वहीं, ईडी ने भी पीठ को अवगत कराया था कि उसे शिकायत मिल चुकी है और वह आरोपों की जांच कर प्रगति रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराएगी।
हाईकोर्ट ने सीबीआई और ईडी के अलावा केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) के निदेशक को भी याचिका में लगाए गए आरोपों पर आठ सप्ताह के भीतर अपने-अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया था।
याचिका की पोषणीयता पर बाद में विचार
सुनावई के दौरान याचिका की पोषणीयता (मेंटेनेबिलिटी) को लेकर उठाए गए सवालों पर खंडपीठ ने कहा था कि इस कानूनी पहलू का परीक्षण सभी संबंधित पक्षों के जवाबी हलफनामे और उन पर आने वाले प्रत्युत्तर (रीजॉइन्डर) दाखिल होने के बाद किया जाएगा।
इसके साथ ही, अदालत ने अपने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता द्वारा सौंपे गए सभी अदालती कागजातों और दस्तावेजों को सीलबंद कवर में सुरक्षित रखा जाए, जिसे 20 जुलाई को खोला जाना था।

