नोएडा के केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी में चार साल की बच्ची पर आवारा कुत्तों के हमले के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। गौतम बुद्ध नगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए पीड़ित परिवार को 1.05 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निवासियों से मेंटेनेंस शुल्क लेने वाली आवासीय समितियां अपने परिसर के भीतर सुरक्षा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह हैं।
आयोग का फैसला और हर्जाना
आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजू शर्मा की पीठ ने RWA को आदेश दिया है कि वह बच्ची को पहुंची शारीरिक चोटों, स्वास्थ्य जोखिम और मानसिक प्रताड़ना के बदले 1,00,000 रुपये का मुआवजा दे। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को अदालती कार्यवाही और कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया गया है। यह राशि आदेश जारी होने के 30 दिनों के भीतर अदा करनी होगी।
कैसे हुई घटना
दर्ज शिकायत के अनुसार, यह हादसा RWA कार्यालय के पीछे स्थित पार्क में हुआ, जहां आवारा कुत्तों के झुंड ने चार साल की बच्ची पर हमला कर दिया था। इस हमले में बच्ची की पीठ पर कैटेगरी-III (गंभीर) के घाव आए थे। मौके से गुजर रहे एक व्यक्ति ने किसी तरह बच्ची को बचाया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाकर रेबीज रोधी टीके लगवाए गए। पीड़ित पिता ने बताया कि इस घटना के बाद से उनकी बेटी मानसिक रूप से सहम गई है और घर से बाहर निकलने में डर रही है।
लापरवाही के आरोप और निवासियों की चेतावनियां
शिकायत में बताया गया कि सोसाइटी में आवारा कुत्तों का आतंक कोई नई बात नहीं थी। निवासियों और बोर्ड के सदस्यों ने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर RWA प्रबंधन को पहले भी कई बार औपचारिक शिकायतें और सुझाव दिए थे। इसके बावजूद RWA ने कोई असरदार कदम नहीं उठाया, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
RWA की दलीलें
अपनी सफाई में RWA ने तर्क दिया कि आवारा कुत्तों का नियंत्रण मुख्य रूप से नोएडा प्राधिकरण और संबंधित राज्य सरकारी विभागों के अधिकार क्षेत्र में आता है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि कानूनी नियमों के कारण प्रबंधन के पास परिसर से कुत्तों को बाहर निकालने का अधिकार नहीं है। RWA के अनुसार, उसने नोटिस बोर्ड, आधिकारिक वेबसाइट और ‘माईगेट’ ऐप के जरिए सलाह जारी कर निवासियों को सतर्क करने की कोशिश की थी।
कानूनी जवाबदेही पर आयोग की टिप्पणी
उपभोक्ता आयोग ने RWA के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान करने के कारण निवासी उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी में आते हैं। पीठ ने रेखांकित किया कि जब RWA रखरखाव शुल्क वसूलती है, तो परिसर के भीतर सुरक्षा, स्वच्छता और सुरक्षित माहौल बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी उसी की बनती है। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि आवारा कुत्तों के खतरे को रोकने में नाकाम रहकर RWA ने अपनी सेवाओं में गंभीर चूक की है, इसलिए वह पीड़ित परिवार को हर्जाना देने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है।

