शादी के महज आठ महीने बाद 19 साल की नवविवाहिता द्वारा खुदकुशी करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी सास की जमानत याचिका को खारिज करते हुए इसे “समाज की एक बेहद परेशान करने वाली वास्तविकता” करार दिया है।
25 मई को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि ₹3 लाख के दहेज की मांग पूरी न होने पर युवती को इस कदर शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया कि उसके पास अपनी जीवनलीला समाप्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
मौत से कुछ घंटे पहले का दर्दनाक फोन कॉल
नवंबर 2024 में इस 19 वर्षीय युवती का शव उसके ससुराल में फंदे से लटका मिला था। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सबूत वह ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जो पीड़िता ने अपनी मौत से चंद घंटे पहले अपने भाई को किए फोन कॉल के दौरान रिकॉर्ड की थी।
इस रिकॉर्डिंग में मृतका रोते हुए अपने साथ हुई प्रताड़ना की कहानी बयां कर रही है। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, विवाद के दौरान उसके पति ने न केवल उसे बेहद भद्दी गालियां दीं और धमकी दी, बल्कि उसके कपड़े तक फाड़ दिए। इतना ही नहीं, आरोपी ने उसे सड़क पर निर्वस्त्र घुमाने की धमकी भी दी थी। कॉल पर रोती हुई युवती ने इस बात पर गहरा दुख और अपमान व्यक्त किया था कि उसके ससुर ने उसे उस लाचार और बदतर हालत में देखा था।
पुलिस और परिजनों के बयानों के मुताबिक, पीड़ित युवती ने अपनी मौत से पहले कई बार अपने माता-पिता और मौसी को बताया था कि अब ससुराल वालों का जुल्म सहना उसके बस से बाहर हो चुका है।
कोर्ट ने खारिज कीं सास की दलीलें: ‘इंस्टाग्राम चैट’ का दिया था हवाला
बचाव पक्ष की ओर से आरोपी सास ने अदालत में दलील दी थी कि जब यह पूरी घटना हुई, तब वह न तो उस झगड़े में शामिल थी और न ही घर पर मौजूद थी। उनके वकील ने दावा किया कि मृतका दहेज प्रताड़ना के कारण नहीं, बल्कि अपने पति की किसी दूसरी लड़की के साथ इंस्टाग्राम चैट को लेकर परेशान थी और इसी विवाद के चलते उसने यह कदम उठाया।
हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जब शादी के कुछ ही समय के भीतर किसी युवा दुल्हन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो अदालतों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच करनी चाहिए।
अदालत ने पाया कि मृतका के परिवार के बयानों में ₹3 लाख के दहेज की लगातार मांग किए जाने की बात स्पष्ट है और इस उत्पीड़न में सास की भूमिका के प्रथम दृष्टया (prima facie) पुख्ता संकेत मिले हैं।
‘एक युवा जीवन का दुखद अंत’: क्यों नहीं मिली जमानत?
सरकारी वकील ने कोर्ट में जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पति कानूनन नाबालिग है, जिसने अपनी मां और पिता के सीधे प्रभाव में आकर इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। ऐसे में सास को इस सुनियोजित उत्पीड़न की मुख्य आरोपियों में से एक माना गया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मोड़ पर आरोपी को जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा। अदालत ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को रिहा किया गया, तो वह मामले के महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित कर सकती है, जिनकी गवाही अभी निचली अदालत में होना बाकी है। इसके अलावा, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि करने वाली अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट का भी अभी इंतजार है।
समाज में व्याप्त दहेज की इस कुप्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की:
“यह मामला आज के समाज की एक कड़वी और परेशान करने वाली हकीकत को दिखाता है। आज के दौर में भी एक 19 साल की युवा लड़की को सिर्फ इसलिए आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि उसके माता-पिता ससुराल वालों (जिसमें याचिकाकर्ता सास भी शामिल है) की ₹3 लाख की गैर-कानूनी मांग को पूरा नहीं कर पाए।”
अदालत के इस आदेश के बाद आरोपी महिला को फिलहाल जेल में ही रहना होगा और निचली अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

