हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘रेडबस’ (RedBus) और एक निजी ट्रैवल कंपनी ‘भरमणी ट्रेवल्स’ पर संयुक्त रूप से 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश एक यात्री की कन्फर्म टिकट को यात्रा से मात्र 17 मिनट पहले रद्द करने के मामले में सुनाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केवल खुद को मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) बताकर जमीनी स्तर की सेवाओं में कमी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
आयोग के अध्यक्ष हिमांशू मिश्रा और सदस्य आरती सूद व नारायण ठाकुर की पीठ ने यह फैसला जयंत पटियाल द्वारा रेडबस लिमिटेड और भरमणी ट्रेवल्स के खिलाफ दायर शिकायत पर सुनाया है। मामला अक्टूबर 2023 की एक घटना से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता जयंत पटियाल ने 5 अक्टूबर 2023 को पालमपुर से दिल्ली जाने के लिए रेडबस के जरिए भरमणी ट्रेवल्स की बस में टिकट बुक किया था। इसके लिए उन्होंने 600 रुपये का भुगतान किया था। टिकट के अनुसार, बस रात 10:15 बजे प्रस्थान करने वाली थी और अगले दिन सुबह 8:00 बजे दिल्ली पहुंचने का समय तय था।
पटियाल तय समय से लगभग 20 से 30 मिनट पहले बोर्डिंग पॉइंट पर पहुंचे और बस के आने की पुष्टि करने के लिए ऑपरेटर से संपर्क किया। वहाँ उन्हें बताया गया कि रात 10:15 बजे की ऐसी कोई बस सेवा निर्धारित ही नहीं है और ऑपरेटर की दिन की आखिरी बस रात 8:00 बजे ही रवाना हो चुकी है।
जब उन्होंने मदद के लिए रेडबस के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया, तो सहायता मिलने के बजाय उन्हें रात 9:58 बजे एक ऑटोमेटेड मैसेज मिला, जिसमें टिकट रद्द होने की जानकारी दी गई थी। यह मैसेज बस प्रस्थान के तय समय से महज 17 मिनट पहले भेजा गया था।
आधी रात को तय करना पड़ा हवाई सफर
ऐन वक्त पर टिकट रद्द होने के कारण दिल्ली के लिए कोई अन्य बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। दिल्ली पहुंचना बेहद जरूरी होने के कारण यात्री को लगभग 40 किलोमीटर दूर नजदीकी हवाई अड्डे जाना पड़ा, जहां से उन्होंने आधी रात के आसपास दिल्ली के लिए एक महंगी फ्लाइट का टिकट खरीदा। इसके बाद पटियाल ने मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक नुकसान और कानूनी खर्च की भरपाई के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
रेडबस की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान रेडबस ने दलील दी कि वह केवल एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो यात्रियों और बस ऑपरेटरों को जोड़ने का काम करता है। बसों के परिचालन समय पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। कंपनी ने दावा किया कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने 585 रुपये ग्राहक के बैंक खाते में और 60 रुपये रेडबस वॉलेट में वापस कर दिए थे। साथ ही, समझौते के तौर पर टिकट के किराये से दोगुनी राशि और माफी की पेशकश भी की थी, जिसे शिकायतकर्ता ने ठुकरा दिया था। दूसरी ओर, नोटिस मिलने के बावजूद भरमणी ट्रेवल्स का कोई प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ एकपक्षीय (ex-parte) कार्यवाही की गई।
आयोग का फैसला और जुर्माना
आयोग ने रेडबस की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि भुगतान स्वीकार करने, सर्विस चार्ज वसूलने और बुकिंग कन्फर्म करने के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। आयोग ने पाया कि रेडबस अपनी साइट पर लिस्ट की गई सेवा की सत्यता जांचने में विफल रहा, जबकि बस ऑपरेटर ने निर्धारित वाहन का संचालन नहीं किया।
पीठ ने कहा कि यात्रा के इतने करीब कन्फर्म टिकट रद्द करना घोर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने दोनों पक्षों को मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
यह राशि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो शिकायत दर्ज कराने की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज लागू होगा।

