गुरुग्राम को मिला उत्तर भारत का सबसे बड़ा न्यायिक परिसर, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने किया ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का उद्घाटन

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को गुरुग्राम में नवनिर्मित अत्याधुनिक न्यायिक परिसर ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का उद्घाटन किया। सात एकड़ क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में से एक है। इस नए परिसर में कोर्टरूम की संख्या बढ़ाकर 55 कर दी गई है, जो पहले केवल 45 थी। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुकदमों के बदलते स्वरूप और जरूरतों के हिसाब से देश की न्याय प्रणाली में भी निरंतर बदलाव होना आवश्यक है।

इस नवनिर्मित परिसर को दो भव्य टावरों के रूप में तैयार किया गया है, जो गुरुग्राम में न्यायिक कार्यक्षमता को काफी मजबूत करेगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस परिसर में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग, एक आधुनिक न्यायिक रिकॉर्ड रूम और हाईकोर्ट की देखरेख में संचालित होने वाला एक प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर) शामिल है। इस गरिमामयी समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे।

देश के एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित गुरुग्राम में मुकदमों का बोझ भी काफी अधिक है। यहां फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से आधे से अधिक के क्षेत्रीय कार्यालय संचालित होते हैं। वर्तमान में इस शहर की अदालतों में 24,000 से अधिक दीवानी (सिविल) मामले, लगभग 1,000 वाणिज्यिक (कमर्शियल) विवाद और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (चेक बाउंस मामलों) के तहत 1 लाख से अधिक केस लंबित हैं।

हरियाणा में अदालती बुनियादी ढांचे का विस्तार

अपने संबोधन के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हरियाणा के सभी जिलों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एकीकृत जिला अदालत परिसर (इंटीग्रेटेड डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कॉम्प्लेक्स) स्थापित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की एकीकृत व्यवस्था से विशेष रूप से वाणिज्यिक विवादों और चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

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यह उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश के लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर भी था। उन्होंने साझा किया कि जनवरी 2017 में जब वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जज के रूप में कार्यरत थे, तब उन्होंने ही इस परिसर का शिलान्यास किया था। इस आयोजन के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने नूंह जिले के तावडू और पुन्हाना में बनने वाले दो नए न्यायिक परिसरों की भी वर्चुअली आधारशिला रखी।

संवैधानिक गरिमा और कानूनी सुधारों पर दिया जोर

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस परिसर को नागरिकों के भरोसे और संवैधानिक गरिमा का अनूठा प्रतीक बताया। गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर बने इस परिसर के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए व्यापार की सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) की तरह ही न्याय की सुगमता (ईज ऑफ जस्टिस) को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पुराने न्यायिक परिसर के एक हिस्से को वकीलों के लिए आधुनिक चैंबर बनाने के लिए आरक्षित किया जाएगा।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस अवसर पर कहा कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहर में मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस इस प्रकार के आधुनिक अदालती परिसर की बेहद जरूरत थी।

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अधीनस्थ न्यायालयों का आधुनिकीकरण

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे न्याय प्रणाली को सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक मजबूत और पारदर्शी न्याय प्रणाली विकसित भारत के निर्माण की बुनियाद है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार जिला और अधीनस्थ स्तर की अदालतों को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। ई-कोर्ट, ई-फाइलिंग, ई-प्रॉसिक्यूशन, ई-प्रिजंस, ई-फोरेंसिक, ई-सेवा केंद्र, डिजिटल पेमेंट और नेशनल ज्यूडिशियल डिजिटल सिस्टम जैसे कदमों से अदालती प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और तेज बनाया जा रहा है।

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इस विचार का समर्थन करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम देश की आर्थिक राजधानी के रूप में तेजी से उभर रहा है, इसलिए इसे अपनी गरिमा के अनुरूप न्यायिक बुनियादी ढांचा मिलना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि साल 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने 1,500 से अधिक पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त किया है। जन विश्वास अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड और एआई-आधारित केस मैनेजमेंट जैसी पहलों ने देश में मुकदमों की पेंडेंसी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समारोह के समापन पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने इस भव्य परिसर के निर्माण में योगदान देने वाले हजारों श्रमिकों, राजमिस्त्रियों, इंजीनियरों और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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