इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराने से इनकार करने वाले एक व्यक्ति को मिल रही जान से मारने की धमकियों के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 9 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली तारीख 16 जुलाई तय की है। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर दबाव बनाने के आरोपी आशुतोष ब्रह्मचारी को भी इस मामले में प्रतिवादी (रेस्पोंडेंट) बनाने का आदेश दिया है।
सुरक्षा सुनिश्चित करने और अधिकारियों को सूचित करने के निर्देश
याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश की जानकारी तुरंत पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंचाएं। इसके तहत बरेली जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और शाहजहांपुर के सदर बाजार थाने के एसएचओ को सूचित किया जाएगा। यह सूचना बरेली और शाहजहांपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के जरिए भेजी जाएगी।
पैसे का लालच और पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता रमाशंकर दीक्षित ने कोर्ट का रुख कर अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। याचिका के अनुसार, यह पूरा विवाद 18 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब तीन अज्ञात लोग दीक्षित के पास पहुंचे। उन्होंने दीक्षित को 56 वर्षीय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक झूठे आपराधिक मामले में फंसाने के लिए पैसों का लालच दिया।
दीक्षित का आरोप है कि जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो उन अज्ञात लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद उनके घर पर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए। हालांकि, दीक्षित का आरोप है कि सुरक्षा में लगाए गए इन पुलिसकर्मियों ने ही उन पर अपना आधिकारिक बयान बदलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस बारे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
शाही ईदगाह विवाद और पिछले मुकदमों से कनेक्शन
इस मामले में नामजद आरोपी आशुतोष ब्रह्मचारी, मथुरा के चर्चित शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि भूमि विवाद मामले में भी याचिकाकर्ताओं में से एक हैं। इससे पहले, ब्रह्मचारी की ही एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करने का आदेश दिया था।
हालांकि, जून महीने में ब्रह्मचारी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एक “फर्जी मुकदमा” दर्ज कराया था। ब्रह्मचारी ने दावा किया था कि उन्होंने यह कदम मथुरा के देवा आश्रम के महंत रामचंद्र दास के भारी दबाव में आकर उठाया था।

