झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी सास को जबरन जहरीला समोसा खिलाकर मारने की आरोपी महिला को जमानत दे दी है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने पिछले साल 21 अगस्त से न्यायिक हिरासत में बंद महिला की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने महिला की रिहाई के लिए कुछ शर्तें तय की हैं। अदालत ने आरोपी को चल रहे मुकदमे में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके लिए उसे अपना मोबाइल नंबर, आधार कार्ड की फोटोकॉपी और एक शपथ पत्र जमा करना होगा, जिसमें यह वादा हो कि वह मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपना फोन नंबर नहीं बदलेगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने उसे शिकायतकर्ता (अपने ससुर) या इस मामले के किसी भी अन्य गवाह को परेशान न करने या किसी भी तरह से बाधा न पहुंचाने की हिदायत दी है।
फोरेंसिक रिपोर्ट का अभी भी इंतजार
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अमित कुमार ने महिला की रिहाई की मांग करते हुए इन आरोपों को पूरी तरह से झूठा बताया। उन्होंने दलील दी कि उनकी मुवक्किल पिछले करीब एक साल (21 अगस्त 2025) से हिरासत में है, जबकि मौत के असल कारणों को लेकर फोरेंसिक साइंस लैब से अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है। वकील ने यह भी रेखांकित किया कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी जहर देने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला था।
घटनाक्रम और शिकायत में देरी की वजह
यह मामला झारखंड के खूंटी जिले का है, जो मई 2025 का बताया जा रहा है। पुलिस की प्राथमिकी (एफआईआर) के मुताबिक, 21 मई 2025 की रात करीब 8 बजे आरोपी महिला ने अपनी सास को जबरन जहर मिला हुआ समोसा खिलाया था। सोने जाने के बाद पीड़िता को उल्टियां होने लगीं, जिससे उनके पति को किसी गड़बड़ी का शक हुआ। अगली सुबह पीड़िता बेहोश हो गई, जिसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां 22 मई 2025 की शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
कानूनी प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण परिवार पहले शव को अपने घर वापस ले गया था। इसके बाद उन्होंने 23 मई 2025 को पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी बहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत हत्या और जहर देकर नुकसान पहुंचाने की धाराओं में मामला दर्ज किया था।
पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमि
पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी महिला और उसकी सास के बीच घटना से कई महीने पहले से लगातार घरेलू विवाद और झगड़े चल रहे थे। दूसरी ओर, आरोपी महिला ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा है कि उसकी सास की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और घरेलू कलह के चलते उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
इससे पहले आरोपी को निचली अदालतों से राहत नहीं मिली थी। सत्र न्यायालय (सेशंस कोर्ट) ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए 4 अगस्त 2025 को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नियमित जमानत याचिका को भी ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस अपराध में महिला की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

