दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ से जुड़े मामले में आरोपी अतहर खान को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसे पुख्ता सबूत मौजूद हैं जो हिंसा भड़काने, लोगों की मौत होने और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में अतहर की भूमिका को दर्शाते हैं।
जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए कहा कि जुलाई 2020 से हिरासत में चल रहे अतहर खान सामान्य परिस्थितियों में भी जमानत पाने के हकदार नहीं हैं। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अगर आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। पीठ ने रेखांकित किया कि अतहर ने पूर्व में जमानत याचिका खारिज होने के आदेशों को कभी चुनौती भी नहीं दी थी। इस मामले का विस्तृत लिखित आदेश अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सह-आरोपियों के साथ समानता का दावा खारिज
अतहर खान ने अपनी जमानत याचिका में इस मामले के एक अन्य सह-आरोपी मोहम्मद सलीम खान के साथ समानता (पैरिटी) का दावा करते हुए राहत की मांग की थी। मोहम्मद सलीम खान को इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
इससे पहले, इस साल जनवरी में एक ट्रायल कोर्ट ने अतहर खान, ताहिर हुसैन और सलीम मलिक की जमानत याचिकाओं को संयुक्त रूप से खारिज कर दिया था। इसके बाद, इसी साल मई में दिल्ली हाईकोर्ट की इसी खंडपीठ ने सलीम मलिक को तो जमानत दे दी थी, लेकिन अतहर खान को राहत देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य सूत्रधार और मददगार का वर्गीकरण
इस मामले में दोनों पक्षों की कानूनी दलीलें मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के इसी साल 5 जनवरी के उस फैसले के इर्द-गिर्द घूमती हैं, जिसमें कोर्ट ने पांच आरोपियों को जमानत दी थी, जबकि कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपियों की भूमिकाओं को स्पष्ट किया था। कोर्ट ने साजिश के ‘मुख्य सूत्रधारों’ (आर्किटेक्ट्स) और ‘मददगारों’ (फैसिलिटेटर्स) के बीच अंतर स्पष्ट किया था। इस वर्गीकरण के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को मुख्य साजिशकर्ताओं की श्रेणी में रखते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। वहीं, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद समेत पांच अन्य लोगों को मददगार की श्रेणी में रखते हुए जमानत दे दी थी। अतहर और सलीम मलिक दोनों ने ही हाईकोर्ट में अपनी याचिकाओं में इन्हीं राहत पाने वाले आरोपियों के साथ समानता का दावा पेश किया था।
सीसीटीवी कैमरे तोड़ने और चक्का जाम की साजिश के आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अतहर खान, सलीम मलिक और मोहम्मद सलीम खान ने कथित तौर पर इस पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने हिंसा के दौरान पहचान छुपाने और बिना किसी डर के काम करने के लिए सरकारी सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था या उन्हें ढक दिया था।
पुलिस जांच के मुताबिक, इस बड़ी साजिश के तहत दिल्ली के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मस्जिदों और मुख्य सड़कों के नजदीक 23 प्रदर्शन स्थल बनाए गए थे, जो चौबीसों घंटे चल रहे थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि मामले के सभी 18 आरोपी इन प्रदर्शनों को एक बड़े ‘चक्का जाम’ में बदलना चाहते थे। कथित तौर पर इस पूरे चक्का जाम की योजना इस तरह बनाई गई थी कि यह फरवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के समय ही हो, ताकि भीड़ जुटने पर प्रदर्शन को और अधिक उग्र किया जा सके।

