करूर भगदड़: मुख्यमंत्री विजय के पीड़ित परिवारों से मिलने पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के करूर भगदड़ पीड़ितों से मिलने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि राज्य के कार्यकारी प्रमुख की आधिकारिक यात्रा को अदालत कैसे नियंत्रित कर सकती है। कड़ा रुख देखते हुए याचिकाकर्ता डीएमके ने अपनी अर्जी वापस ले ली, जिसके बाद कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान डीएमके की याचिका के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता इस अर्जी को वापस नहीं लेता है, तो इसे खारिज कर दिया जाएगा। इसके बाद डीएमके के वकील ने अन्य कानूनी रास्ते तलाशने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने पर सहमति जताई।

अदालत ने याचिका पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने डीएमके का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार से पूछा कि पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने और राहत सामग्री बांटने को गवाहों को प्रभावित करना कैसे माना जा सकता है। अदालत ने सवाल किया कि क्या कोर्ट किसी राज्य के कार्यकारी प्रमुख को उनके सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोक सकता है।

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय आगामी 10 जुलाई को करूर का दौरा करने वाले हैं। इस यात्रा के दौरान वह प्रभावित परिवारों से मिलेंगे और उन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी के नियुक्ति पत्र, सरकारी आदेश और अन्य राहत सहायता वितरित करेंगे।

READ ALSO  एमपी हाईकोर्ट ने किशोरी बलात्कार पीड़िता की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी

डीएमके की याचिका और चिंताएं

यह याचिका डीएमके सचिव आरएस भारती की ओर से दायर की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि मुख्यमंत्री विजय, राज्य मंत्री आधव अर्जुना और अन्य आरोपियों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक पीड़ितों के परिवारों के साथ उनके संपर्क को नियंत्रित करने की मांग भी की गई थी।

READ ALSO  प्याज-लहसुन न खाने की धार्मिक मान्यता बनी वैवाहिक विवाद की जड़; गुजरात हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने विवाह-विच्छेद को बरकरार रखा

डीएमके ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि इस हादसे के संबंध में शुरूआती चार्जशीट में नामजद कई लोग वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद अब राज्य सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं।

करूर भगदड़ का पृष्ठभूमि मामला

यह कानूनी विवाद करूर में हुई एक दर्दनाक भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 13 अक्टूबर को जांच सीबीआई को सौंप दी थी। तब अदालत ने कहा था कि इस त्रासदी की भयावहता ने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है, इसलिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

READ ALSO  अतीक के हत्यारों को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles