केरल हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: जंगली हाथी ‘KM1’ पर रखी जाए कड़ी नजर, अदालत ने कहा— ‘हर जान कीमती है’

केरल हाईकोर्ट ने कन्नूर जिले के अरलम फार्म और आसपास की आदिवासी बस्तियों में सक्रिय जंगली हाथी ‘KM1’ को लेकर राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जंगली जानवरों के मूवमेंट पर “निरंतर सतर्कता” और निगरानी रखना सरकार की मौलिक जिम्मेदारी है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस ईस्वरन एस की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में हाथी की मौजूदगी से पैदा हुए गंभीर खतरों की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया था।

हाईकोर्ट ने राज्य के वन विभाग को इस मामले में सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हाथी ‘KM1’ की गतिविधियों की “उचित निगरानी” सुनिश्चित की जाए। बेंच ने जोर देकर कहा कि भविष्य में इस जानवर के कारण कोई भी अप्रिय घटना न हो, इसके लिए अधिकारियों को हर संभव कदम उठाने चाहिए।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी याद दिलाते हुए भावुक लेकिन सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “हर जान कीमती है और सख्त नियंत्रण व निगरानी के माध्यम से नागरिकों की रक्षा की जानी चाहिए।” अदालत ने यह भी माना कि हालांकि अधिकारियों को उनका कर्तव्य याद दिलाना “अनावश्यक” होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह निर्देश देना अनिवार्य हो गया है।

यह कानूनी कार्यवाही बैजू पॉल मैथ्यूज पी.एम. द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि ‘KM1’ का इंसानों पर हमला करने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। अरलम फार्म के प्रतिनिधियों ने भी इन चिंताओं का समर्थन करते हुए कहा कि हाथी की रिहायशी इलाकों और आदिवासी बस्तियों से नजदीकी स्थानीय समुदाय के लिए तत्काल खतरा बनी हुई है।

अदालत ने अब राज्य के अधिकारियों से उनके द्वारा किए गए निगरानी प्रयासों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर एक औपचारिक जवाब मांगा है। वन विभाग को अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 20 मई, 2026 को तय की गई है।

अरलम क्षेत्र के निवासियों और आदिवासी परिवारों को उम्मीद है कि हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष से राहत मिलेगी और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

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