बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2021 के एंटीलिया बम मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसे मजबूत प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं, जो वाजे को देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने और नागरिकों के बीच आतंक फैलाने के उद्देश्य से की गई कथित आतंकी गतिविधियों से जोड़ते हैं।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील स्वीकार करते हुए विशेष अदालत के सितंबर में दिए गए जमानत आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी की ओर से प्रस्तुत सामग्री प्रथम दृष्टया देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा, विशेष रूप से आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने तथा समाज के एक वर्ग में आतंक पैदा करने के इरादे की ओर संकेत करती है।
खंडपीठ ने विशेष अदालत द्वारा जमानत आवेदन पर विचार करने के तरीके पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
आतंकी गतिविधियों से जुड़े मजबूत प्रथम दृष्टया साक्ष्य
हाईकोर्ट ने कहा कि कथित साजिश का निशाना उद्योगपति मुकेश अंबानी का परिवार था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंबानी परिवार का औद्योगिक कारोबार देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
खंडपीठ ने माना कि वाजे के कथित कृत्यों का उद्देश्य भारत की सुरक्षा, विशेष रूप से आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालना था।
कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस अधिकारी का ऐसी गतिविधियों में शामिल होना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के किसी भी नागरिक, विशेष रूप से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले उद्योगपति को आतंक के खतरे का सामना नहीं करना चाहिए।
खंडपीठ के अनुसार, NIA ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज अपराधों से वाजे को जोड़ने वाली मजबूत प्रथम दृष्टया सामग्री प्रस्तुत की है।
खौफ पैदा कर उद्योगपतियों से वसूली करने की कथित योजना
हाईकोर्ट ने वाजे के पुलिस सेवा में दोबारा बहाल होने के बाद की गतिविधियों पर भी विचार किया। वाजे को 16 वर्षों के निलंबन के बाद सेवा में वापस लिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि वाजे खुद को दोबारा ‘सुपर कॉप’ के रूप में स्थापित करना चाहता था। इसके लिए उसकी कथित योजना पहले लोगों और अंबानी परिवार में भय पैदा करने, फिर अमीर उद्योगपतियों को सुरक्षा देने के नाम पर उनके करीब पहुंचने और धीरे-धीरे उनसे पैसे वसूलने की थी।
खंडपीठ ने कहा कि यह पूरी योजना किसी फिल्म की कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन इसके परिणाम गंभीर आपराधिक कृत्यों की श्रेणी में आते हैं।
कोर्ट ने यह भी पाया कि वाजे ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए समाज में भय का माहौल पैदा किया और विशेष रूप से एक प्रमुख उद्योगपति के परिवार को निशाना बनाया।
हाईकोर्ट ने वाजे के कई प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच संपर्क और प्रभाव का भी उल्लेख किया।
विशेष अदालत के जमानत आदेश पर गंभीर सवाल
हाईकोर्ट ने वाजे को जमानत देने वाली विशेष अदालत की कार्यवाही और उसके आदेश में की गई टिप्पणियों पर गहरी चिंता जताई।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि NIA वाजे के खिलाफ UAPA के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रही है। अदालत ने यह भी माना था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि वाजे के कथित कृत्य से अंबानी परिवार आतंकित हुआ था।
विशेष अदालत ने अंबानी परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज नहीं करने पर NIA से सवाल किया था। उसने पूछा था कि क्या जांच एजेंसी इसके लिए किसी शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रही है।
NIA ने हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती देते हुए इसे कानून की दृष्टि से गलत बताया। एजेंसी का तर्क था कि वाजे पर आतंक फैलाने के उद्देश्य से गतिविधियों में शामिल होने के साथ हत्या का भी आरोप है।
जांच एजेंसी ने विशेष अदालत का आदेश रद्द करने और अंतरिम राहत के रूप में उस पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने पहले जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब अपील स्वीकार करते हुए उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
क्या है एंटीलिया बम मामला?
25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी एक SUV मिली थी।
यह वाहन पहले ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन के पास था और बाद में इसके चोरी होने की बात सामने आई थी। हिरेन का शव 5 मार्च 2021 को ठाणे की एक खाड़ी में मिला था।
NIA का आरोप है कि उस समय मुंबई क्राइम ब्रांच में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर तैनात सचिन वाजे ने साजिश के तहत खुद विस्फोटकों से भरी SUV अंबानी के आवास के पास खड़ी की थी।
जांच एजेंसी ने एंटीलिया बम मामले और मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े संयुक्त मामले में वाजे को 13 मार्च 2021 को गिरफ्तार किया था।
सितंबर में विशेष अदालत से जमानत मिलने के तुरंत बाद NIA ने हाईकोर्ट का रुख किया था। जमानत आदेश पर अंतरिम रोक के कारण वाजे ठाणे सेंट्रल जेल में ही बंद रहा।
एंटीलिया मामले में गिरफ्तारी के बाद वाजे को CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच किए जा रहे भ्रष्टाचार के मामले में भी आरोपी बनाया गया था। उस मामले में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।
अब बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद एंटीलिया मामले में विशेष अदालत से मिली उसकी जमानत समाप्त हो गई है।
