दिल्ली में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, केंद्र सरकार से जांच करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के बाजारों में प्रतिबंधों के बावजूद पटाखों की बिक्री की खबरों पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से मामले की जांच करने को कहा। कोर्ट ने उन रिपोर्टों का संज्ञान लिया, जिनमें दावा किया गया है कि राजधानी के कई बाजारों में बिना प्रमाणन वाले पटाखे भी आसानी से उपलब्ध हैं।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 3 नवंबर को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इन आरोपों पर गौर करने को कहा।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार बाजारों में लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाले पटाखों के साथ ऐसे उत्पाद भी बेचे जा रहे हैं, जिन पर अनिवार्य QR कोड नहीं है।

कोर्ट की यह टिप्पणी दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर नए निर्देश जारी किए जाने के एक दिन बाद आई है।

ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तय की शर्तें

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सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर के आदेश में दिल्ली-NCR में 4 से 6 नवंबर तक प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी थी। इन पटाखों को केवल 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय में ही जलाया जा सकेगा।

पटाखे जलाने के लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है। कोर्ट ने 9 नवंबर से सभी प्रकार के पटाखों पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया है।

आदेश के अनुसार केवल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति होगी।

पटाखों की बिक्री केवल निर्धारित स्थानों पर की जा सकेगी। ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई गई है।

इसके अलावा प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद से संबंधित QR कोड होना अनिवार्य है, जिससे उसके प्रमाणन की पुष्टि की जा सके। कोर्ट ने लड़ियों और बेरियम युक्त पटाखों के निर्माण पर भी प्रतिबंध लगाया है।

दिल्ली के कई बाजारों में नियमों के उल्लंघन का दावा

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सुप्रीम कोर्ट के सामने आई 3 नवंबर की रिपोर्ट में चांदनी चौक, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी सहित कई इलाकों में पटाखों की बिक्री का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट 22 अक्टूबर और 2 नवंबर को इन बाजारों में की गई पड़ताल पर आधारित थी।

इसके अनुसार दुकानदार ग्रीन, प्रदूषण मुक्त और जीरो पॉल्यूशन के नाम पर पटाखे बेच रहे थे। हालांकि, ग्राहकों के मांगने पर पारंपरिक पटाखे भी कथित तौर पर उपलब्ध कराए जा रहे थे।

रिपोर्ट में पटाखों के प्रमाणन को लेकर भी सवाल उठाए गए। कुछ पैकेटों पर QR कोड नहीं थे, जबकि कुछ पर लगे कोड प्रमाणन की पुष्टि करने वाली वेबसाइट के बजाय ऑनलाइन उत्पाद कैटलॉग पर ले जा रहे थे।

कई मामलों में दुकानदारों ने कथित तौर पर पारंपरिक पटाखों को सामने प्रदर्शित नहीं किया था, लेकिन ग्राहक के मांगने पर उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा था।

पहले भी प्रतिबंधों को लागू करने में खामियां सामने आई थीं

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सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के मद्देनजर पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंधों से संबंधित कई आवेदनों पर सुनवाई कर रहा है।

अपने 2 नवंबर के आदेश में कोर्ट ने स्वीकार किया था कि पहले लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल को रोकने में सफल नहीं रहे।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि प्रतिबंधित पटाखों को ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। इसके साथ ही पिछले निर्देशों को लागू करने में खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया था।

इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में पटाखों की बिक्री से जुड़े नए आरोपों का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से मामले की जांच करने को कहा है।

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