इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर यह तय करने का निर्देश दिया है कि लखनऊ और अन्य शहरों में ई-रिक्शा के नए रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं। कोर्ट ने कहा कि जिन शहरों में ई-रिक्शा की संख्या आवश्यकता से अधिक हो गई है, वहां इनकी बढ़ती संख्या ट्रैफिक जाम की समस्या को गंभीर बना रही है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि लखनऊ में लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शा चल रहे हैं, जिनकी वजह से यातायात व्यवस्था पर काफी दबाव पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन क्षेत्रों में नए ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन को सीमित करने की संभावना पर विचार करने को कहा, जहां इनकी संख्या आवश्यकता से अधिक हो चुकी है।
ई-रिक्शा पर पहले से लागू प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लखनऊ की कुछ सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन पर पहले से लागू प्रतिबंधों के पालन में कमी पर भी ध्यान दिया।
कोर्ट ने कहा कि 12 मई 2022 को जारी आदेश के तहत लखनऊ की कई सड़कों पर ई-रिक्शा का संचालन प्रतिबंधित है, लेकिन इन प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है।
खंडपीठ ने विशेष जांच दल (SIT) को मौजूदा प्रतिबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की संभावना की जांच करने का निर्देश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां भी ई-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए, वहां यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
हाईकोर्ट ने मोटर वाहन नियम, 1998 के नियम 178 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने का अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन शुल्क में दी गई छूट का अर्थ यह नहीं है कि ई-रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर चल सकते हैं। सड़क पर संचालन के लिए उनका रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
लखनऊ में ट्रैफिक जाम की समस्या का अध्ययन करेगा IIT-BHU
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कमता चौराहे और पॉलीटेक्निक-कमता-चिनहट मार्ग पर लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम का मुद्दा भी उठाया गया।
हाईकोर्ट ने इन क्षेत्रों में यातायात की समस्या का स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया।
कोर्ट को बताया गया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU), वाराणसी इस क्षेत्र की यातायात व्यवस्था का स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन करेगा।
इस अध्ययन में विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों के आवागमन का आकलन, ट्रैफिक सिमुलेशन और यातायात सुधार के लिए तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्ताव तैयार करना शामिल होगा।
खंडपीठ ने मामले में गठित समिति के प्रस्तावों और लखनऊ नगर निगम की ओर से उठाए गए कदमों की भी समीक्षा जारी रखी।
हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने और प्रभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने अधिकारियों से उठाए गए कदमों की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
