सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई 21 जनवरी, 2027 को निर्धारित की है। कोर्ट ने सभी पक्षों को 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी लिखित दलीलें और अन्य आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने उन आवेदकों को भी दो सप्ताह के भीतर अलग रिट याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी, जिनकी याचिकाओं को पहले अंतरिम आवेदनों के रूप में दर्ज किया गया था।
पीठ ने निर्देश दिया कि नई याचिकाओं की प्रतियां नोडल वकील को उपलब्ध कराई जाएं। नोडल वकील याचिकाकर्ताओं की दलीलों और उनकी ओर से उद्धृत न्यायिक फैसलों को संकलित करेंगे। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी लिखित दलीलों पर जवाब दाखिल करने को कहा।
केंद्र ने पहले की व्यवस्था बरकरार रखने का आग्रह किया
सुनवाई के दौरान नोडल वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में पहले पांच प्रमुख याचिकाएं निर्धारित की गई थीं, जबकि 135 अन्य याचिकाओं को अंतरिम आवेदनों में बदल दिया गया था।
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी पक्ष अपनी लिखित दलीलें दाखिल करें, जिन्हें एक साथ संकलित कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 17 अप्रैल, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में याचिकाओं को देखते हुए उस समय केवल पांच प्रमुख याचिकाओं पर सुनवाई की व्यवस्था बनाई गई थी।
मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि पहले तय की गई इस व्यवस्था को बरकरार रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में कुछ प्रावधानों पर लगाई थी रोक
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर, 2025 को इस कानून पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कानून की संवैधानिकता के पक्ष में लागू अनुमान का उल्लेख करते हुए कुछ प्रावधानों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी।
इनमें वह प्रावधान भी शामिल था, जिसके तहत वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति का कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का पालन करना आवश्यक था।
कोर्ट ने संशोधित अधिनियम की धारा 3(आर) के संबंधित हिस्से पर तब तक रोक लगाई थी, जब तक राज्य सरकारें यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना देतीं कि कोई व्यक्ति पिछले पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का पालन कर रहा है या नहीं।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्तियों की स्थिति निर्धारित करने के लिए कलेक्टर को दिए गए अधिकारों से संबंधित प्रावधानों पर भी रोक लगाई थी।
कोर्ट ने उस प्रावधान के क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई थी, जिसके अनुसार नामित अधिकारी की रिपोर्ट आने तक किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।
वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या पर भी निर्देश
सितंबर 2025 के अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संस्थाओं में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या को लेकर भी निर्देश जारी किए थे।
कोर्ट ने कहा था कि 20 सदस्यीय केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या चार से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इसी तरह, 11 सदस्यीय राज्य वक्फ बोर्डों में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य रखने का निर्देश दिया गया था।
इन अंतरिम निर्देशों के बीच वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब इन पर अगली सुनवाई 21 जनवरी, 2027 को होगी।
