सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2013 के रेप मामले में दोषी ठहराए गए पत्रकार और तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की जेल की सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने तेजपाल और गोवा सरकार की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।
पीठ ने कहा कि वह 62 वर्षीय पत्रकार की सजा निलंबित करने के पक्ष में नहीं है। तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा था ट्रायल कोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को तरुण तेजपाल को 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर महिला सहकर्मी से रेप करने का दोषी ठहराया था। यह घटना तहलका पत्रिका द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
हाईकोर्ट ने तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अदालत ने पांच साल पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तेजपाल ने 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अपनी दोषसिद्धि तथा सजा को चुनौती दी।
तेजपाल का दावा है कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद तेजपाल को फिलहाल सजा निलंबित कराने में राहत नहीं मिली है।
