अरावली में अवैध खनन से हो सकता है अपूरणीय नुकसान, सुप्रीम कोर्ट गठित करेगा विशेषज्ञ समिति

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है और इस मुद्दे की व्यापक एवं वैज्ञानिक जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति खनन व संबंधित विषयों पर समग्र अध्ययन करेगी और सीधे शीर्ष अदालत की निगरानी में कार्य करेगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और न्याय मित्र के परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर खनन, भूविज्ञान और पर्यावरण विशेषज्ञों के नाम सुझाने का निर्देश दिया।

“यह समिति इस न्यायालय के निर्देश और पर्यवेक्षण में कार्य करेगी,” पीठ ने स्पष्ट किया।

शीर्ष अदालत का यह आदेश “In Re: Definition of Aravalli Hills and Ranges and Ancillary Issues” नामक स्वतः संज्ञान मामले में आया है, जहां अदालत अरावली पर्वतों की परिभाषा और उससे संबंधित प्रभावों की जांच कर रही है। नवंबर 2023 में अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति की सिफारिश पर अरावली की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया था और तब तक नए खनन पट्टों पर रोक लगाई थी जब तक विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती।

उस परिभाषा के अनुसार, “अरावली हिल” ऐसा कोई भी भौगोलिक स्थल है जिसकी ऊंचाई उसके आसपास के इलाके से 100 मीटर या अधिक हो, और “अरावली रेंज” ऐसे दो या दो से अधिक हिल्स का समूह है जो एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर हों।

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लेकिन इस परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने आशंका जताई कि इससे कई क्षेत्रों को पर्यावरणीय सुरक्षा से बाहर कर दिया जाएगा।

इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को अपने पूर्ववर्ती आदेश को स्थगित कर दिया था और स्पष्ट किया था कि परिभाषा में मौजूद “गंभीर अस्पष्टताओं” पर विचार आवश्यक है — विशेष रूप से यह कि क्या 100 मीटर ऊंचाई और 500 मीटर की दूरी की कसौटी पर्याप्त है।

अब, बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उस स्थगन को आगे बढ़ाते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का रास्ता साफ किया।

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि अरावली में बिखरे हुए क्षेत्रों में अवैध खनन अभी भी हो रहा है। इस पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को भरोसा दिलाया कि ऐसा कोई भी अनधिकृत खनन अब नहीं होने दिया जाएगा।

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अरावली श्रृंखला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है। यह न केवल हरियाली और भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि रेगिस्तान के विस्तार को भी रोकती है। राजस्थान और हरियाणा में दशकों से जारी अवैध खनन ने इस क्षेत्र को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है।

सुप्रीम कोर्ट की पहल से अब उम्मीद जगी है कि अरावली क्षेत्र में पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित नीति बनाई जाएगी।

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