सुप्रीम कोर्ट: किफायती उपचार मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण,और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी एवं जस्टिस एम आर शाह की संयुक्त पीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। स्वास्थ्य के अधिकारों में किफायती उपचार शामिल है। पीठ ने आगे कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की तरफ से संचालित हो रहे अस्पतालों में किफायती इलाज का प्रावधान करे। 

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यह विवादित नही किया जा सकता कि किन कारणों से इलाज महंगा है। और यह आम नागरिकों के लिए बिल्कुल सस्ता नही है। भले कोई व्यक्ति कोरोना से जीवित हो लेकिन आर्थिक रूप से कई बार मर चुके है। इसलिए अधिक से अधिक प्रावधान राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा किये जाए या निजी अस्पतालों द्वारा लिए जाने वाले फीस पर कैप लगाना होगा। इसके लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम की शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है। 

किफायती उपचार मौलिक अधिकार

पीठ ने यह भी कहा कि देश के नागरिकों का अधिक से अधिक टेस्ट करवाया जाए ,सही तथ्य और आंकड़े घोषित करने होंगे । कोरोना संक्रमित होने वाले व्यक्तियों के तथ्य और आंकड़ों के परीक्षण को घोषणा करने की संख्या में पारदर्शिता होनी चाहिये। नही तो लोगों को गुमराह किया जाएगा। और लोगों की धारणा बन जाएगी कि सब ठीक है और वह लापरवाह हो जाएंगे।

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